
Salkasa Amgaon Road:सालेकसा-आमगांव मार्ग (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bagh River Bridge: एक ओर पूरे देश में 3 जनवरी को क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई, जिन्होंने महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। लेकिन दूसरी ओर सालेकसा-आमगांव मार्ग पर सावित्रीबाई की बेटियां पिछले तीन वर्षों से भी अधिक समय से असुरक्षित यात्रा करने को मजबूर हैं। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए शासन-प्रशासन अब तक कोई ठोस कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है। सालेकसा-आमगांव मार्ग पर बाघ नदी पर लगभग 50 वर्ष पूर्व बना पुल अत्यंत जर्जर स्थिति में है।
पुल की खराब हालत के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों के साथ-साथ महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल (एसटी) की बस सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। परिणामस्वरूप आमगांव-सालेकसा बसों को आमगांव-साकरीटोला-तिरखेड़ी मार्ग से डायवर्ट किया गया है। इस क्षेत्र में रेल सेवाएं बेहद सीमित हैं और सालेकसा रेलवे स्टेशन कई गांवों से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में महिला यात्रियों और छात्राओं के लिए एसटी बस सेवा सबसे सस्ती, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का साधन थी। लेकिन पिछले तीन वर्षों से रोढ़ा से साकरीटोला तक के सैकड़ों गांवों की छात्राएं और महिलाएं इस सुविधा से वंचित हैं।
बस सेवा बंद होने के कारण छात्राओं को स्कूल और कॉलेज पहुंचने के लिए या तो काली-पीली ऑटो, अथवा अपरिचित कार चालकों और दोपहिया वाहनों से यात्रा करनी पड़ रही है, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक है। यही स्थिति उन महिलाओं की भी है, जो रोजमर्रा के कार्यों के लिए आमगांव या सालेकसा आती-जाती हैं। पिछले दो वर्षों से अधिक समय से इस मार्ग पर महिलाओं और छात्राओं की यात्रा असुरक्षित बनी हुई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या शासन-प्रशासन किसी अनहोनी की प्रतीक्षा कर रहा है?
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झालिया की जि.प. सदस्य छाया नागपुरे ने कहा कि बाघ नदी पर पुल की जर्जर स्थिति के कारण एसटी बस सेवाएं बंद हैं, जिससे इस मार्ग पर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए शासन-प्रशासन को तत्काल ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।






