मुद्दे मौजूद, लेकिन जनाधार नहीं: संभाजीनगर में कांग्रेस-एनसीपी की चुनौती; मनपा चुनाव में उत्साह गायब

Municipal Election Analysis: छत्रपति संभाजीनगर में कांग्रेस का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है। मनपा चुनाव में बुनियादी मुद्दे होने के बावजूद पार्टी में उत्साह और आक्रामकता की कमी नजर आ रही है।
Issues exist, but lack momentum: The challenge for Congress-NCP in Sambhaji Nagar; enthusiasm is missing in the municipal elections
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Maharashtra Urban Politics: छत्रपति संभाजीनगर शहर में कांग्रेस का प्रभाव लगातार कमजोर होता जा रहा है। कभी मनपा चुनाव में पूरी ताकत के साथ शिवसेना- भाजपा के साथ मुकाबला करने वाली कांग्रेस पार्टी आज मानो अंतिम सांसें गिनती नजर आ रही है।

पिछले करीब 30 वर्षों से शहर की सत्ता पर शिवसेना-भाजपा युति का वर्चस्व रहा है। इसके बावजूद आज भी शहर के नागरिक पानी जैसी बुनियादी समस्या से जूझ रहे हैं।

इन मुद्दों को जनता के सामने प्रभावी ढंग से रखने का अवसर कांग्रेस व एनसीपी शरद पवार गुट के पास है। लेकिन पार्टी के भीतर ही मनपा चुनाव को लेकर उत्साह की कमी दिखाई दे रही है।

2015 में एमआईएम का 25 सीटों पर था कब्जा

आज इस दमखम को एमआईएम ने कमजोर कर दिया है। हालांकि, आज भी कांग्रेस का संगठन काफी मजबूत है। लेकिन, पार्टी में आपसी मतभेद से खुद पार्टी के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मनपा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने के लिए विशेष प्रयास करते नहीं दिखाई दे रहे है।

इसका असर, मनपा चुनाव में कांग्रेस पर होकर कुल 115 नगरसेवकों में से पार्टी के 5 नगरसेवक चूना जाना भी मुश्किल लग रहा है। याद रहे कि अप्रैल 2015 में संपन्न हुए मनपा चुनाव में एमआईएम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 25 सीटों पर कब्जा जमाया था।

वहीं, कांग्रेस सिर्फ 10 पर सीमट गयी थी। अभी भी कांग्रेस के पास सत्ताधारियों की कमजोरी उजागर अपना दमखम दिखाने का अवसर है। लेकिन प्रचार कौन करेगा, इसको लेकर खुद पार्टी के नेताओं की भौएं तनी हुई है।

अजीत पवार गुट भी लगा रहा ताकत

शिंदे गुट की शिवसेना पालकमंत्री संजय शिरसाट के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरी है। शिंद सेना का अधिकतर स्थानों पर मुख्य मुकाबला महायुति की सहयोगी भाजपा से ही देखने को मिल रहा है।

कुछ क्षेत्रों में शिंदे सेना और उद्धव ठाकरे गुट के उम्मीदवारों के बीच भी सीधा मुकाबला है। पालकमंत्री अपने पास होने के कारण शिंदे गुट भी मनपा चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरी है, और उसका प्रदर्शन शहर में दूसरे नंबर रहने का दावा राजनीतिक जानकार जता रहे है।

वहीं, राज्य में सत्ता में शामिल एनसीपी (अजित पवार गुट) भी अपने दम पर चुनाव लड़ रहा है। अजित पवार गुट का अधिक फोकस मुस्लिम और दलित बहुल इलाकों पर है।

पुराने शहर में कांग्रेस पार्टी का था दबदबा

कांग्रेस ने भले ही एनसीपी शरद पवार गुट के साथ गठबंधन किया है। लेकिन इस गठबंधन का प्रभाव मनपा चुनाव में बहुत अधिक होता नहीं दिखाई दे रहा है। कांग्रेस नेताओं की निष्क्रयता का सीधा असर उम्मीदवारी पर पड़ रहा है।

पार्टी की ओर से चुनाव मैदान में उतरे कई उम्मीदवार अपने दम पर ही किस्मत आजमाने को मजबूर है। उन्हें संगठनात्मक स्तर पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

कांग्रेस के एक उम्मीदवार ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी से विशेष सहयोग न मिलने के कारण वे अपनी जीत को लेकर वह स्वयं आशंकित है।

हालांकि, जालना से कांग्रेस सांसद डॉ. कल्याण काले का कुछ क्षेत्र शहर में आता है। सांसद डॉ.  काले अपने प्रभाव क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिए नियोजन कर रहे है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है। लेकिन एक समय पुराने शहर में कांग्रेस का दमखम रहता था।

रणनीति के तहत चुनाव मैदान में डटे भाजपाई

इधर, लगभग यही स्थिति एनसीपी शरद पवार गुट की भी है। शरद पवार की एनसीपी का गठन हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन शहर में यह गुट आज तक अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज नहीं करा पाया।

इसके चलते कांग्रेस के साथ-साथ एनसीपी (शरद पवार गुट) का प्रभाव भी शहर से लगभग समाप्त होता दिख रहा है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने मनपा चुनाव जीतकर अपना महापौर बनाने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत झोंक दी है।

पार्टी के नेता और पदाधिकारी सुनियोजित रणनीति के तहत चुनाव मैदान में जुटे हुए हैं और भाजपा छत्रपति संभाजीनगर मनपा पर अपने दम पर परचम लहराने के पूरजोर कोशिशों में जुटी है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com