Gadchiroli: 9 महीने की गर्भवती ने 5 KM पैदल चलकर जान गंवाई! बच्चे की भी मौत, जानें पूरा मामला

Gadchiroli News: एटापल्ली तहसील में एक गर्भवती महिला और उसके शिशु की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट पर है। 5 किमी पैदल चलने के दावों के बीच, जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कारणों का खुलासा किया।
Etapalli pregnant woman death Gadchiroli ZP CEO Suhas Gade visit
गर्भवती की मौत की जांच (सौजन्य-नवभारत)
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Gadchiroli Maternal Death News: गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील के बुर्गी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत आने वाले आलदंडी टोला निवासी आशा संतोष किरंगा (24) नामक गर्भवती महिला की मृत्यु होने की घटना शुक्रवार को घटी। बताया जा रहा है कि गर्भवती माता 1 जनवरी को अपने पति के साथ आलदंडी से करीब 5 किमी दूरी स्थित पेठा गांव में पैदल ही पुजारी के पास गई थी। रात के समय पेठा गांव में उन्होंने रात बिताने का निर्णय लिया।

ऐसे में 2 जनवरी के तड़के उसे प्रसव पीड़ा शुरू होने के कारण उन्होंने आशा वर्कर से संपर्क किया। जिसके बाद आशा ने तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध कराकर हेडरी स्थित लॉयड्स काली अम्मा अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को डाक्टरों ने शल्यक्रिया करने का निर्णय लिया।

लेकिन तब तक पेट में ही शिशु की मृत्यु हो गयी और बढ़े ब्लड प्रेशर के चलते माता की भी मृत्यु होने की घटना घटी। गड़चिरोली की इस घटना की जानकारी मिलते ही शनिवार को जिला परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुहास गाडे और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रताप शिंदे आलदंडी टोला गांव में पहुंचकर संपूर्ण घटना की जानकारी ली है।

पैदल चलने से मृत्यु होने का दावा झूठा

संबंधित गर्भवती माता की उपचार अथवा एम्बुलेंस के अभाव में पैदल चलने की नौबत आने की बात पूरी तरह झूठी है। गर्भवती माता आलदंडी टोला से पेठा गांव में पुजारी के पास गयी थी। तड़के उसकी तबीयत बिगड़ गयी। इसकी जानकारी मिलते ही आशा ने तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध कराकर हेडरी के अस्पताल में भर्ती कराया। जिससे गर्भवती माता की पैदल चलने के कारण मृत्यु होने का दावा झूठा है।

  • डा. प्रताप शिंदे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिप, गड़चिरोली

मामले में प्रशासन की लापरवाही नहीं

ग्रामीण व दुर्गम परिसर में माता-बाल मृत्यु मामले संदर्भ में प्रशासन अत्यंत संवेदनशील होकर कोई भी घटना घटने पर उसकी विस्तृत जांच की जाती है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक सेवा तत्काल उपलब्ध कराई गयी। जिससे प्रशासन द्वारा किसी भी तरह लापरवाही बरती नहीं गई है। गर्भवती माता व अन्य किसी भी गंभीर बीमारी का मरीज पुजारी, वैदू और अंधश्रध्दा पर आधारित उपचार की ओर न जाते हुए सीधे सरकारी स्वास्थ्य विभाग, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आशा स्वयंसेविका और एम्बुलेंस से सपंर्क करें। समय पर वैद्यकीय उपचार मिलने पर अनेक जाने बचाई जा सकती है।

  • सुहास गाडे, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिप, गड़चिरोली
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