मनरेगा में बड़ी लापरवाही: गड़चिरोली में 28,000 मजदूरों की 10 माह से मजदूरी अटकी, मजदूरों में बढ़ा रोष

Gadchiroli MNREGA Wages: गड़चिरोली में नरेगा के 28 हजार से अधिक मजदूरों की 10 माह से 5 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी अटकी। भुगतान न मिलने पर मजदूरों में रोष बढ़ा।
Gadchiroli MNREGA Wages: गड़चिरोली में नरेगा के 28 हजार से अधिक मजदूरों की 10 माह से 5 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी अटकी। भुगतान न मिलने पर मजदूरों में रोष बढ़ा।
मजदूरों को नहीं मिली मजदूरी (सौजन्य-नवभारत)
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MNREGA Payment Pending: मजदूरों का गांव से स्थलांतरण रोकने और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य व केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आरंभ की है। इस योजना के तहत पंजीकृत मजदूर व उनके परिवार के सदस्यों को सप्ताहभर का रोजगार उपलब्ध कर 15 दिनों के भीतर मजदूरी की राशि उनके बैंक खाते में जमा कराने के निर्देश सरकार द्वारा दिए गये है।

लेकिन गड़चिरोली जिले में पिछले 10 महीनों से 28 हजार 32 मजदूरों की तकरीबन 5 करोड़ रुपयों से अधिक की मजदूरी प्रलंबित होने की जानकारी मिली है। बकाया मजदूरी के लिए कार्यालय के चक्कर कांटने पर भी संबंधितों के बैंक खाते में उनका मेहनताना पहुंच नहीं रहा है।

2005 से कानून लागू

जिसके कारण मजदूरों में सरकारी कार्यप्रणाली के प्रति तीव्र रोष व्यक्त हो रहा है। उधर मजदूरी नहीं मिलने से मजदूरों के परिवार पर भी अब भुखमरी की नौबत आ पड़ी है। देश के सभी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 में रोजगार गारंटी का कानून लागू किया। योजना के तहत 15 दिनों का रोजगार उपलब्ध होते ही आगामी 15 दिनों के भीतर संबंधितों के बैंक खाते में मजदूरी की राशि जमा करना आवश्यक है। यदि मजदूरी की राशि जमा करने में देरी हो रही हैं, उतना ही दिनों का ब्याज जोड़कर मजदूर को देना है। इस योजना के तहत आदिवासी बहुल गड़चिरोली जिले में बड़े पैमाने पर कार्य किये गये। अगस्त से नवंबर 2024 की अवधि में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कर उनके पलायन को रोका भी गया।

फसलें हो गई बर्बाद

लेकिन अब 10 महीनों की अवधि बीत जाने के बाद भी संबंधित मजदूरों को कार्य का मेहनताना नहीं मिल पाया है। इस मजदूरी के लिए अब संबंधितों को कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे है। ग्रापं द्वारा केवल एक ही जवाब दिया जा रहा है कि सरकार द्वारा ही मजदूरी नहीं मिली हैं तो मजदूरों के खाते में कैसे पैसे जमा किये जा सकेंगे।

सरकार की इस नीति के कारण अब मजदूरों में रोष व्यक्त होने लगा है। वर्तमान में वापसी की बारिश से किसान व मजदूरों की धान फसल बर्बाद हो गयी है। उधर जंगली हाथी भी बची-कूची कसर छोड़ नहीं रहे है। ऐसी स्थिति में भुखमरी से बचने के लिए नरेगा की बकाया मजदूरी तत्काल देने की मांग की जा रही है।

जानकारी लेकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी

इतने लंबे समय तक मजदूरों की मजदूरी प्रलंबित रखना गलत है। इस मामले की जांच होगी। वहीं संबंधितों से मजदूरों की सूची उनकी समूचित जानकारी लेकर बकाया मजदूरी तत्काल देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - चेतन हिंवज, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (नरेगा), गड़चिरोली

तहसील निहाय मजदूरों की संख्या व बकाया मजदूरी

तहसील मजदूरों की संख्या बकाया मजदूरी (₹)
धानोरा 2,377 46,73,638
अहेरी 4,565 86,63,113
आरमोरी 1,085 18,42,824
भामरागड़ 233 4,34,718
देसाईगंज 3,850 74,75,528
चामोर्शी 3,561 73,77,247
एटापल्ली 3,301 62,16,286
गड़चिरोली 3,139 58,82,297
कोरची 704 13,70,454
कुरखेड़ा 2,474 48,26,689
मुलचेरा 1,232 24,64,164
सिरोंचा 1,508 32,49,269
कुल 28,032 5,44,76,257
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