मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है और अब जल्द ही उम्मीदवार मैदान में होंगे। इसी बीच डिंडोरी विधानसभा सीट पर नजर डालते हैं, जो नासिक जिले की अहम सीट मानी जाती है। यह सीट पांच अन्य विधानसभा क्षेत्र के साथ दिंडोरी लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। यहां पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मतदाताओं की संख्या 70% से अधिक है। जिनकी संख्या करीब करीब 2 लाख 16 हजार के आसपास है। आइए जानते हैं इस सीट पर किस पार्टी का पलड़ा भारी है।
महाराष्ट्र की दिंडोरी विधानसभा सीट महाराष्ट्र चुनाव के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। यहां पर अधिकतर समय कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस का दबदबा सीट पर कायम रहा है। ऐसे में यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं है कि इस बार ये सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार) या महाविकास आघाड़ी के खेमे में ही जा सकती है। 2019 में यहां से राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार नरहरि सीताराम झिरवाल ने जीत हासिल की थी।
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शरद पावर का पलड़ा भारी 2019 में नरहरि शरद पवार की पार्टी का हिस्सा थे और अब उन्होंने पाला बदलकर अजीत पवार के खेमे में हाजिरी लगाई है। अगर इस बार राष्ट्रवादी कांग्रेस (दोनों पार्टी) का उम्मीदवार यहां से खड़ा होता है तो मुकाबला NCP बनाम NCP ही देखने को मिलेगा। अगर इस सीट से महा विकास आघाड़ी के कांग्रेस के उम्मीदवार या शिवसेना के उम्मीदवार अपनी ताल ठोकते हैं तो मतदाता उनके पक्ष में वोट कर सकते हैं। लेकिन अगर शरद पवार पार्टी का उम्मीदवार यहां से उतरता है तो उसका पलड़ा भारी माना जाएगा।
दिंडोरी विधानसभा सीट पर किसने मारी बाजी, डालें एक नजर
वर्ष | उम्मीदवार | दल | कुल वोट |
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2024 | – | – | – |
2019 | नरहरी सीताराम झिरवाल | राकांपा | 1,24,50 |
2014 | नरहरी सीताराम झिरवाल | राकांपा | 68,284 |
2009 | धनराज हरिशंकर महाले | एसएचएस | 68,569 |
2004 | नरहरी सीताराम झिरवाल | राकांपा | 61,205 |
1999 | रामदास किसन चारोस्कर | राकांपा | 32,522 |
1995 | किसन गोविंद चारोस्कर | कांग्रेस | 51,970 |
1990 | गायकवाड़ भगवान धर्मजी | कांग्रेस | 41,837 |
1985 | हरी शंकर महाले | जेएनपी | 36,551 |
1980 | हरी शंकर महाले | जेएनपी(जेपी) | 29,999 |
1978 | गायकवाड़ भगवान धर्मजी | कांग्रेस(आई) | 23,321 |
1972 | भाऊ राऊत कचरू | कांग्रेस | 24, 340 |
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और 20 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 23 नवंबर को वोटों की गिनती होगी, यानी 24 नवंबर तक यह साफ हो जाएगा कि दिंडोरी की जनता ने किस पार्टी के पक्ष में वोट किया है और उन्होंने किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताया है। मौजूदा विधायक नरहरि सीताराम झिरवाल लगातार दो बार से यहां विधायक रहे हैं तो ऐसे में तीसरी बार भी उनकी जीत की संभावना बनती है, लेकिन तीसरी बार उनका जितना आसान नहीं होगा। क्योंकि शरद पवार के साथ सिंपैथी वाला फैक्टर नरहरि सीताराम झिरवाल के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिंडोरी विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। यहां पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को मिलाकर करीब 2 लाख 21,600 मतदाता है और यह कुल आबादी का 70 फीसदी से अधिक वोट बैंक है। ऐसे में जो भी उम्मीदवार इस वोट बैंक को खुश करने में कामयाब होगा, वही जीत हासिल कर पाएगा। दिंडोरी विधानसभा क्षेत्र में 100% ग्रामीण मतदाता हैं। ऐसे में चुनाव के दौरान इस समीकरण को नजरअंदाज करना किसी भी पार्टी के लिए नुकसान का सौदा हो सकता है।