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ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट बंद, एक पुलिस वाले की चाकू मारकर हत्या, तेहरान में बवाल
- Written By: अक्षय साहू
Protest in Tehran: ईरान में गिरती मुद्रा के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन तेज हुए हैं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी की अपील के बाद हालात हिंसक, इंटरनेट बंद और राजनीतिक संकट गहराया।

ईरान में सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Protests: ईरान में पिछले लगभग दो हफ्तों से गिरती राष्ट्रीय मुद्रा रियाल के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी हैं। गुरुवार रात इन प्रदर्शनों ने उस समय और उग्र रूप ले लिया, जब निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने ईरानी जनता से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ खुला विरोध करने की अपील की। उनकी इस अपील के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और कई शहरों में रैलियां व मार्च निकाले गए।
हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी है और कई इलाकों में सख्ती बरती जा रही है। जानकारी के मुताबिक, ईरान के कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और कई जगहों पर टेलीफोन लाइनों को भी काट दिया गया है। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर सरकार और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों में अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है।
एक पुलिस वाले की चाकू मारकर हत्या
इसके अलावा गुरुवार की रात प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच भारी झड़पें हुई, जिसमें एक पुलिसकर्मी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। साथ ही तेहरान के कई इलाकों में आगजनी की गई साथ ईरान के झंड़े को जलाया गया।
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Massive protests in and around Isfahan (3rd largest city in Iran) 👇 Regime forces are fleeing. pic.twitter.com/P9JMemj6Ur — Dr. Eli David (@DrEliDavid) January 8, 2026
क्या ईरान में फिर लौटेगी राजशाही?
इन प्रदर्शनों की खास बात यह है कि इन प्रदर्शनों में क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में भी नारे लगाए जा रहे हैं, जबकि अब तक शाह या पहलवी परिवार के समर्थन में नारे लगाने पर कड़ी सजा, यहां तक कि मौत की सजा तक का प्रावधान रहा है।
All eyes on Iran. Widespread protests in Iran. Call for freedom✊🏽 pic.twitter.com/9ONJUsb8U9 — Masud Gharahkhani (@MasudGh) January 8, 2026
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक हुई हिंसा में कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,260 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच कई जगहों पर हिंसक झड़पों की खबरें सामने आई हैं। कुछ इलाकों में सरकारी वाहनों और सुरक्षाबलों की संपत्ति को आग के हवाले किए जाने की घटनाएं भी हुई हैं।
इस्लामिक क्रांति में शाह को छोड़ना पड़ा था देश
1979 की इस्लामिक क्रांति से ठीक पहले ईरान के तत्कालीन शाह मोहम्मद रेजा पहलवी देश छोड़कर अमेरिका चले गए थे। उनके बेटे और उस समय के क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी तब से निर्वासन में रह रहे हैं। मौजूदा प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने और एकजुट होकर अपनी मांगें उठाने की अपील की। उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक, उसके नेतृत्व और रिवॉल्यूशनरी गार्ड को चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया ईरान पर नजर रखे हुए है और लोगों पर होने वाले अत्याचार का जवाब दिया जाएगा।
Iranian Police vehicles set ablaze tonight in Anti-Mullah Regime protests in Iran. pic.twitter.com/1ZOBFuJtcg — Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) January 8, 2026
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहलवी की अपील के बाद गुरुवार रात करीब आठ बजे बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकल आए। प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाही मुर्दाबाद” और “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। इसके साथ ही “यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस आएंगे” जैसे नारे भी सुनाई दिए, जो इस आंदोलन की दिशा और तीव्रता को दर्शाते हैं।
ईरान में क्यों हो रहे प्रदर्शन?
ईरान में ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए थे, जब तेहरान में दुकानदारों ने डॉलर के मुकाबले रियाल की लगातार गिरती कीमत के खिलाफ आवाज उठाई थी। देखते ही देखते यह विरोध देश के अन्य शहरों में भी फैल गया। आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता का गुस्सा अब सीधे सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ सामने आ रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस्लामिक रिपब्लिक की नीतियों के कारण देश गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया है। रियाल की स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14 लाख रियाल तक पहुंच गई है। तुलना करें तो 1979 की इस्लामिक क्रांति के समय एक डॉलर की कीमत मात्र 70 रियाल थी, जबकि 2015 के परमाणु समझौते के दौर में यह करीब 32 हजार रियाल थी।
यह भी पढ़ें: प्रवासी भारतीय दिवस: क्यों मनाया जाता है यह खास दिन? जानें महात्मा गांधी से जुड़ा गौरवशाली इतिहास
ट्रंप ने सरकार को दी धमकी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरानी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रंप के बयानों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
Frequently Asked Questions
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Que: ईरान में प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
Ans: गिरती ईरानी मुद्रा, महंगाई और गंभीर आर्थिक संकट के कारण लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
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Que: रेजा पहलवी की भूमिका क्या है?
Ans: निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने जनता से सड़कों पर उतरकर इस्लामिक रिपब्लिक का विरोध करने की अपील की है।
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Que: प्रदर्शनों के खिलाफ ईरान सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
Ans: सरकार ने इंटरनेट बंद किया है, सुरक्षाबल तैनात किए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया है।
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