
चंद्रपुर में धान फसल की कटाई तेज हुई, नहीं मिल रहे मजदूर (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Chandrapur Paddy Harvesting: इस साल धान क्षेत्रों में कटाई का सीजन जोरों पर है। खराब मौसम के कारण किसान यह काम जल्द निपटाना चाहते हैं। परंतु इसके लिए मजदूर ही न मिल रहे जिसके कारण किसान परेशान है। चिंतित किसान अब मशीनों का जुगाड़ करने में जुटे हैं। बल्लारपुर तहसील के कोठारी क्षेत्र में वापसी की बारिश के कारण चावल की कटाई थोड़ी देर से शुरू हुई, लेकिन अब कटाई जोरों पर है।
चावल की कटाई, कटे हुए चावल के लिए पिंजरे बनाना और उसे सुखाना, फिर चावल की मड़ाई और अंत में कटे हुए अनाज को सुरक्षित घर पहुंचाना जैसे कामों में किसान व्यस्त है। इस पूरे क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से तीनों मौसम में खेती के लिए मजदूर मिलना मुश्किल हो गया है। मजदूरों की भारी कमी और उसके कारण आसमान छूती मजदूरी की दरें किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं।
मजदूरों की कमी को दूर करने के लिए, धान किसानों ने अब बड़े पैमाने पर मशीनीकरण का रास्ता अपनाया है। चावल की कटाई के बाद सबसे जरूरी प्रक्रिया मड़ाई है, इस काम के लिए पारंपरिक तरीके की बजाय आधुनिक मड़ाई मशीनों का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। ये मशीनें कम समय में, कम श्रम और अधिक मात्रा में धान की कटाई का काम पूरा करती हैं।
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जहां मशीनों का उपयोग बिल्कुल संभव नहीं है, वहां किसानों ने मजदूरों की कमी को दूर करने के लिए पारंपरिक ‘पैरा’ पद्धति को पुनर्जीवित किया है। इस पद्धति में, गांव के किसान और उनके परिवार मिलकर एक-दूसरे के खेतों में धान की कटाई का काम समय पर पूरा करते हैं। इससे मजदूरों पर आर्थिक दबाव कम हुआ है और सामूहिक प्रयासों से कटाई का काम तेजी से पूरा हो रहा है।






