नवभारत संपादकीय: BJP को तेलंगाना में मिली विफलता

Congress Municipal Win: तेलंगाना पालिका चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत सीटें जीतकर सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। बीआरएस और बीजेपी को अपेक्षा से कम समर्थन मिला।
Navbharat Editorial: BJP faces failure in Telangana
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Telangana Local Body Elections: आम तौर पर देखा जाता है कि महानगरपालिका, आशा नगरपालिका व जिला परिषद चुनावों में राज्य की सत्ताधारी पार्टी ही जीतती है। महाराष्ट्र में भी बीजेपी या उसकी महायुति को इन चुनावों में व्यापक सफलता मिली। तेलंगाना में सत्तारूढ़ होने के बाद से सवा दो वर्षों में कांग्रेस ने अपनी विजय का सिलसिला लगातार कायम रखा।

विधानसभा के बाद हुए लोकसभा चुनावों में 17 में से 8 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार विजयी रहे थे। पंचायत चुनाव में ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली। विधानसभा की 2 सीटों पर हुए उपचुनाव में जीत के बाद पालिका चुनाव में मिली बिजय से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राज्य में अपनी पकड़ और मजबूत की।

नगरपालिका की कुल 2,995 सीटों में से सत्ताधारी कांग्रेस को 1,537, पूर्व मुख्यमंत्री के। चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति को 781 तथा बीजेपी को सबसे कम 336 सीटें मिलीं।

कांतीस को 40 प्र।श।, भारत राष्ट्र समिति को 29 प्रतिशत तथा बीजेपी को 15 प्रतिशत वोट मिले। तेलंगाना का पालिका चुनाव बीजेपी को मिश्रित नतीजे देने वाला रहा।

शहरी व अर्धशहरी क्षेत्रों में बीजेपी के जीतने की उम्मीद थी, लेकिन वह सिर्फ निजामाबाद और करीमनगर में विजयी हो पाई। दक्षिण भारत में कर्नाटक के बाद तेलंगाना में अपना प्रभाव मजबूत करने की बीजेपी की रणनीति है।

दक्षिण के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व केरल जैसे राज्यों में बीजेपी अपने बल पर नहीं जीत सकती। वहां उसे मित्र दलों के सहयोग की आवश्यकता होती है। कर्नाटक के बाद तेलंगाना में अपना प्रभाव बढ़ाने का बीजेपी प्रयास कर रही है।

वह धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण पर बल दे रही है। इस तरह के प्रयासों से 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें 3 से बढ़कर 8 हो गई, आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर जैसे मुस्लिम बहुल शहरों में ध्रुवीकरण की वजह से बीजेपी के सांसद चुने गए थे।

एमआईएम के वर्चस्व वाली हैदराबाद महापालिका में बीजेपी ने हिंदुत्व का नारा बुलंद किया था जिसकी वजह से बीजेपी के 48 प्रत्याशी चुनाव जीते थे। उसके बाद से अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए बीजेपी विभिन्न प्रयोग कर रही है। सीटें और मत प्रतिशत बढ़ने से वह राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है।

10 वर्षों तक तेलंगाना में सत्तारूढ़ रही चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति जैसी क्षेत्रीय पार्टी ने महापालिका चुनाव में दूसरा क्रमांक हासिल किया। बीजेपी का अनुभव रहा है कि जब तक क्षेत्रीय पार्टी कमजोर न हो जाए, उसे सफलता नहीं मिलती।

महाराष्ट्र में शिवसेना व राष्ट्रवादी में फूट डालकर बीजेपी ने अपनी ताकत बढ़ाई। हरियाणा में चौटाला के लोकदल, असम में असम गण परिषद, गोवा में गोमांतक पार्टी को कमजोर कर बीजेपी ने अपना प्रभाव मजबूत किया।

कर्नाटक में देवगौड़ा की पार्टी जदसे को बीजेपी ने अपना सहयोगी बनाया है। मित्र दलों को कमजोर और लाचार बनाकर बीजेपी अपनी राजनीतिक चाल चलती है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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