
बोनस न मिलने से धान उत्पादक किसानों में रोष (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Lakhandur Paddy Farmers: लाखांदुर तहसील के सैकड़ों धान उत्पादक किसानों को पिछले खरीफ मौसम में प्रति हेक्टेयर 20,000 रुपए की बोनस राशि शासन द्वारा घोषित की गई थी, लेकिन अब तक उन्हें यह राशि प्राप्त नहीं हुई है। इसी कारण नाराज किसानों ने आत्मदहन की चेतावनी दी थी। 17 नवंबर को आत्मदहन के लिए निकल रहे किसानों को पुलिस ने रोका। इस दौरान भंडारा जिले के जिला विपणन अधिकारी संभाजी चंद्रे, तहसीलदार वैभव पवार और थानेदार सचिन पवार ने किसानों से चर्चा की। डीएमओ द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद किसानों ने आत्मदहन का निर्णय वापस ले लिया।
जिला विपणन विभाग में तकनीकी खराबियों के कारण सातबारा पर पंजीयन वाले और सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेचने वाले किसानों दोनों की सूची में कई नाम ब्लैकलिस्ट हो गए थे। संस्था संचालकों ने इसकी कई बार जानकारी दी, लेकिन विभाग द्वारा समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। गत खरीफ सीजन में घोषित बोनस एक वर्ष बीत जाने के बावजूद किसानों को नहीं मिला, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
इसकी वजह से रबी सीजन की तैयारी, घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्य प्रभावित हुए। साथ ही, असमय वर्षा से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ, जिससे किसान पहले ही तनावग्रस्त थे। रयत किसान संघ ने 11 नवंबर को जिलाधिकारी को दिए गए निवेदन में 17 नवंबर को आत्मदहन की चेतावनी दी थी। उसी के अनुसार भंडारा जाते समय पुलिस ने तहसील के 24 किसानों को रोक लिया।
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डीएमओ संभाजी चंद्रे, तहसीलदार वैभव पवार और थाना प्रभारी सचिन पवार ने किसानों से बातचीत कर विभागीय पोर्टल के माध्यम से समस्याओं का शीघ्र समाधान करने का आश्वासन दिया। शासन से अब तक 8 करोड़ 62 लाख 79 हजार 934 रुपए की बोनस राशि प्रधान कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। शासन द्वारा लंबित राशि मिलते ही सभी अड़चनें दूर कर किसानों को बोनस तुरंत प्रदान करने का लिखित आश्वासन अधिकारियों ने दिया, जिसके बाद किसानों ने आत्मदहन का निर्णय रद्द कर दिया।






