
इंदौर के 'जहर' पर पूर्व CM उमा भारती का वार
Indore water contamination: इंदौर जो अपनी स्वच्छता के लिए देश भर में पहचाना जाता है, आज आंसुओं और मातम में डूबा है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई 15 मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस त्रासदी पर राजनीति गरमा गई है और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार के सिस्टम पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जब अधिकारी आपकी सुन नहीं रहे थे, तो आप पद पर बैठकर बिसलेरी पानी क्यों पीते रहे, आपने इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना बेहतर क्यों नहीं समझा।
यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का भी बन गया है। साल 2025 के अंत में हुई इन मौतों को उमा भारती ने सरकार और व्यवस्था के लिए कलंक बताया है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इसे जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए प्रशासन को कुंभकर्णी नींद में होने का आरोप लगाया। उमा भारती ने साफ कहा कि ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता, इसका या तो प्रायश्चित होगा या फिर दंड मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए इसे परीक्षा की घड़ी बताया है।
1. साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं।
2. प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और… — Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
रेसीडेंसी कोठी में हुई उच्च स्तरीय बैठक में प्रशासन की आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और एसीएस संजय दुबे के सामने अपनी बेबसी जाहिर की। उनका कहना था कि अधिकारियों के पास काम का इतना बोझ है कि वे सुनते ही नहीं हैं। जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा ने तो यहां तक कह दिया कि अब हाथ उठाने की नौबत आ गई है। विधायक महेंद्र हार्डिया और पार्षद भी अधिकारियों के फोन न उठाने और मनमानी करने से परेशान दिखे। इसी लाचार व्यवस्था के कारण सीवर का पानी पीने की लाइनों में मिलता रहा और प्रशासन बेखबर रहा।
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उमा भारती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्वच्छ शहर के अवार्ड वाले नगर में ऐसी गंदगी और जहर मिला पानी शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि जिंदगी की कीमत महज दो लाख रुपए का मुआवजा नहीं हो सकती, क्योंकि परिवार का दुख जीवन भर रहता है। उन्होंने मांग की है कि नीचे से लेकर ऊपर तक, जो भी इस लापरवाही का दोषी है, उसे कठोरतम दंड दिया जाए और पीड़ित परिवारों से माफी मांगी जाए। यह घटनाक्रम अब केवल एक हादसा नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल पूछ रहा है कि क्या वाकई जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या सब कुछ बयानों तक सीमित रह जाएगा।






