संभाजीनगर मनपा में बवाल: कर्मचारी से मारपीट करने वाला ठेकेदार होगा 'ब्लैकलिस्ट', आयुक्त के कड़े निर्देश

Sambhajinagar Municipal Corporation: मनपा लेखा विभाग के कर्मचारी से कथित मारपीट के बाद प्रशासन हरकत में आया। घटना के बाद लंबे समय से लंबित करीब 250 फाइलों को मंजूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ाया गया।
Chaos in Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation: Contractor who assaulted employee will be 'blacklisted', Commissioner issues strict instructions
महानगरपालिका, लेखा विभाग, लंबित फाइलें,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sambhajinagar Civic Administration: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के लेखा विभाग के एक कर्मचारी के साथ हुई कथित मारपीट की घटना के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना के बाद करीब दो माह से विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़ी लगभग 250 फाइलों को अचानक गति मिलने से मनपा प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले एक ठेकेदार के बिल से संबंधित फाइल की मंजूरी को लेकर लेखा विभाग के एक लिपिक और ठेकेदार के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि यह विवाद मारपीट तक पहुंच गया।

इसके बाद संबंधित कर्मचारी ने सिटी चौक पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। घटना सामने आते ही मनपा मुख्यालय में खलबली मच गई। सूत्रों के अनुसार, मनपा प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। मनपा आयुक्त अमोल येडगे के निर्देश पर शहर अभियंता द्वारा संबंधित ठेकेदार को काली सूची में शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

लेखा विभाग में कई दिनों से बड़ी संख्या में फाइलें लंबित होने तथा कुछ फाइलों का पता नहीं चलने की चर्चा लगातार हो रही थी। बताया जाता है कि कथित मारपीट की घटना के अगले ही दिन लगभग 250 फाइलें बाहर निकाली गईं। ये फाइलें विभिन्न स्तरों पर मंजूरी की प्रतीक्षा में रुकी हुई थीं।

फाइलों की बढ़ी आवाजाही

मारपीट की घटना के बाद अचानक बढ़ी फाइलों की आवाजाही और लंबे समय से लंबित प्रस्तावों को मिली गति ने प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए है। लेखा विभाग में फाइले लंबे समय तक लंबित रहने के कारणों तथा वास्तविक स्थिति की गहन जांच की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। जानकारों का मानना है कि प्रशासन यदि इस पूरे मामले में पारदर्शी भूमिका अपनाता है।

संबंधित प्रस्ताव मंजूरी के लिए आयुक्त कार्यालय भेजे

घटना के बाद विभाग के विभिन्न अनुभागों में हस्ताक्षरों का सिलसिला तेज हो गया। लंबे समय से लंबित फाइलें एक के बाद एक विभिन्न टेबलों से होकर अतिरिक्त आयुक्त स्तर तक पहुंचीं। इसके बाद संबंधित प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए आयुक्त कार्यालय भेजे गए।

बताया जाता है कि पूरे दिन फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया युद्धस्तर पर चलती रही बिलों की मंजूरी के लिए महीनों से कार्यालयों के चक्कर लगाने वाले कई ठेकेदारों ने लेखा विभाग की अचानक बढ़ी कार्यगति का स्वागत किया है, नियमित रूप से अनुवर्ती कार्रवाई करने के बावजूद कार्य पूरे नहीं होने की शिकायत करने वाले ठेकेदारों को अब उम्मीद है कि उनकी लंचित फाइलें भी जल्द मंजूर हो सकेंगी।

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