

Ajit Pawar Birth Anniversary: 22 जुलाई का दिन महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में एक विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज ही के दिन राज्य के कद्दावर नेता रहे अजित पवार का जन्म हुआ था। 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के देवलाली में उनका जन्म हुआ था। वो महाराष्ट्र के लोकप्रिय नेता थे। इसी वर्ष 28 जनवरी 2026 को हुए एक दुखद विमान हादसे में उनके असमय निधन के बाद यह पहला मौका है जब उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता उनके बिना उनकी जयंती मना रहे हैं। पूरे महाराष्ट्र में अजित पवार की पहचान एक सख्त प्रशासक और जनता के चहेते 'अजित दादा' के रूप में थी।
उन्हें राज्य भर की महिलाओं से एक बड़े भाई जैसा सम्मान और स्नेह मिलता था। हालांकि, महिलाओं के बीच अजित पवार की इस अपार लोकप्रियता के पीछे एक मुख्य आधार उनकी धर्मपत्नी और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार का जमीनी सामाजिक कार्य था, जिन्होंने लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर उनके राजनीतिक आधार को मजबूती दी।
उस्मानाबाद के प्रभावशाली मराठा परिवार में जन्मी सुनेत्रा पवार के पिता बाजीराव पाटिल और भाई पदमसिंह पाटिल महाराष्ट्र की राजनीति के जाने-माने नाम रहे हैं। वर्ष 1985 में पदमसिंह पाटिल की पहल पर सुनेत्रा पवार का विवाह अजित पवार से संपन्न हुआ था। विवाह के बाद कई दशकों तक सुनेत्रा पवार ने सीधे तौर पर सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी, लेकिन वे पुणे और बारामती क्षेत्र में सामाजिक कार्यों के जरिए महिलाओं से लगातार जुड़ी रहीं।
बारामती के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए खुले में शौच की समस्या को देखते हुए उन्होंने स्वच्छता और शौचालय निर्माण का एक बड़ा जन-अभियान चलाया। उनके प्रयासों के चलते वर्ष 2006 में काठेवाड़ी गांव को देश का पहला 'निर्मल ग्राम' का दर्जा मिला था। सुनेत्रा पवार के इन सामाजिक कल्याणकारी कार्यों के बल पर ही अजित पवार ने महिलाओं से जुड़ी कई ऐतिहासिक राज्यस्तरीय योजनाओं को धरातल पर उतारा, जिससे वे महिलाओं के बीच बेहद लोकप्रिय होते चले गए।
अजित पवार ने अपने जीवनकाल के अंतिम वर्षों में सुनेत्रा पवार को सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सुनेत्रा पवार ने बारामती सीट से अपनी ननद और वरिष्ठ सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि, उस कड़े मुकाबले में सुप्रिया सुले ने जीत हासिल की थी।
इस चुनावी हार के बाद अजित पवार ने अपनी सांगठनिक रणनीति के तहत सुनेत्रा पवार को संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा भेज दिया था। वहां उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी और अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया और विधायी प्रक्रियाओं की गहराई से समझ हासिल की।
अजित पवार के असमय निधन ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और महाराष्ट्र सरकार के सामने एक बड़ा नेतृत्व संकट खड़ा कर दिया था। ऐसे कठिन समय में सुनेत्रा पवार ने न केवल परिवार को संभाला, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के सर्वसम्मति से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कमान अपने हाथों में ली।
वर्तमान में वे न केवल पार्टी की मुख्य धुरी बनी हुई हैं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री पद का उत्तरदायित्व भी संभाल रही हैं। जो सुनेत्रा पवार कभी सामाजिक कार्यों तक सीमित रहकर 'अजित दादा' की सफलता का आधार बनती थीं, आज वे राज्य की राजनीति में एक मजबूत और परिपक्व महिला नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ रही हैं।