
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Jalgaon Jalna Railway Project: छत्रपति संभाजीनगर जलगांव जालना 174 किमी लंबे व करीब 7,106 करोड़ रुपए की लागत वाले रेलवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। रेलवे विभाग को उम्मीद है कि इस परियोजना से दुर्घटनाओं की संख्या शून्य तक आएगी।
समझा जाता है कि जलगांव में रेल की पटरियां बिछाने से पहले जरूरी सभी प्राथमिक कार्य कुछ दिन पहले ही शुरू किए गए हैं। प्रस्तावित जलगांव जालना रेलवे मार्ग से खानदेश व मराठवाड़ा को बड़ा लाभ होने की उम्मीद है। यहीं नहीं, जलगांव व जालना जिलों के विकास के बीच नया संपर्क स्थापित होगा।
जलगांव से गुजरात और राजस्थान जाने वाली व वहां से आने वाली यात्री और मालगाड़ियों को आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत से अधिक तेज और सीधी रेल संपर्क सुविधा उपलब्ध होगी। रेल विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि परिवहन लागत में भी कमी आएगी।
विशेष रूप से जालना जिले के राजूर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों व विश्वविख्यात अजंता गुफाओं को देखने के लिए देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए भी यह रेलवे मार्ग बेहद सुविधाजनक साबित होगा, पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
जलगांव जालना रेल्वे मार्ग के तहत जलगांव रेलवे स्टेशन के समीप लेडी नाले से भूमि समतलीकरण का कार्य पहले ही पूरा किया गया है। तदुपरांत अब ठेकेदार ने सुरक्षा दीवार के निर्माण का श्रीगणेशा भी कर दिया है, इसके लिए जमीन में गहरी खुदाई कर मजबूत नीव तैयार की जा रही है।
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ऊंची सुरक्षा दीवार बनने के बाद जालना रेलवे मार्ग के किनारे स्थित रिहायशी इलाकों में भविष्य में अतिक्रमण बढ़ने का कोई खतरा नहीं रहेगा, इससे रेलगाड़ियों की गति पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। औद्योगिक, कृषि और पर्यटन क्षेत्र के विकास की दृष्टि से जलगांव जालना रेलवे मार्ग बेहद अहम होने से परियोजना पर नागरिकों की नजरें लगी हुई है।






