अमरावती पोहरा चिरोड़ी के जंगलों में बाघ की दस्तक; कैमरा ट्रैप में कैद हुई तस्वीरें, वन विभाग अलर्ट

Amravati News: अमरावती जिले के पोहरा चिरोड़ी वन में दो वर्षों से बाघ की सक्रिय मौजूदगी की पुष्टि, सर्वे में ताजा पगमार्क और कैमरा ट्रैप में तस्वीर कैद, गांवों को सतर्क रहने की अपील
Tiger sighting in Amravati Pohara-Chirodi forests; camera traps capture images, forest department alert
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Melghat Tiger Reserve News: अमरावती जिले के पोहरा वन क्षेत्र से वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पिछले कुछ समय से चर्चा में रहे उस धारीदार बाघ की पोहरा-चिरोड़ी वन परिसर में नियमित मौजूदगी देखी जा रही है। ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन सर्वे 2025-26 के दौरान पोहरा वन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में बाघ के स्पष्ट और ताजा पगमार्क पाए गए हैं, जिससे पोहरा-मालखेड़ क्षेत्र में उसकी उपस्थिति की पुष्टि हुई है।

यह सर्वे केवल बाघों की संख्या आंकने के लिए ही नहीं, बल्कि उनके आवास के संरक्षण और भविष्य की संरक्षण नीतियां तय करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ की मौजूदगी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत है। वन विभाग की जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से पोहरा-चिरोडी वन परिक्षेत्र और आसपास के इलाकों में बाघ की गतिविधि लगातार देखी जा रही थी।

अब एक ही क्षेत्र में बार-बार पगमार्क, पेड़ों पर खरोंच के निशान और शिकार के अवशेष मिलने से यह स्पष्ट हो गया है कि बाघ ने इसी क्षेत्र को अपना ठिकाना बनाया है। नियमित गश्त के दौरान जलस्रोतों और पगडंडियों के पास मिले पगमार्क का आकार और दूरी वयस्क बाघ की ओर संकेत करते हैं। इसके साथ ही बाघ की तस्वीर कैमरा ट्रैप में भी कैद हुई है।

मेलघाट में बाघों की संख्या 110 के पार

वन विभाग ने आसपास के गांवों को सतर्क रहने की सूचना देते हुए अनावश्यक रूप से जंगल में प्रवेश न करने और रात के समय खुले में मवेशी न छोड़ने की अपील की है। बाघ से संबंधित कोई भी जानकारी तुरंत वन विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, अमरावती जिले के मेलघाट टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर जारी आंकड़ों के अनुसार 105 बाघों की आधिकारिक पुष्टि हुई थी, जिनमें 27 नर, 45 मादा और 33 शावक शामिल थे। ताज़ा जानकारी के अनुसार यह संख्या 110 से अधिक होने का अनुमान है, जबकि अंतिम सर्वे रिपोर्ट शीघ्र जारी की जाएगी।

समृद्ध वन संपदा पर लगाई मुहर

अधिकारियों के अनुसार, पोहरा वन क्षेत्र में पर्याप्त शिकार प्रजातियां, घना जंगल और स्थायी जलस्रोत उपलब्ध होने के कारण यह क्षेत्र बाध के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। हालांकि, जंगल से सटे गांवों में बाघ की मौजूदगी को लेकर भय का माहौल भी देखा जा रहा है।

वन संरक्षण प्रयासों को सफलता

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, पोहरा वन क्षेत्र में बाघ का बसना जैव विविधता और वन संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता है। उचित निगरानी और सुरक्षा जारी रहने पर भविष्य में यह क्षेत्र बाघों के लिए सुरक्षित और महत्वपूर्ण आवास बन सकता है। फिलहाल वन विभाग बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए आवश्यक उपाय कर रहा है।

दीर्घकालीन निगरानी आवश्यक

डॉ. स्वप्निल सोनवणे, अध्यक्ष, यूथ फॉर नेचर कंजरवेशन सोसायटी, के द्वारा अमरावती जिले में पिछले सर्वेक्षण में भी पोहरा मालखेड़ जंगल में बाघ के पगमार्क और कैमरा ट्रैप में मौजूदगी दर्ज की गई थी। हालांकि बाघ स्थायी है या भ्रमणशील, यह जानने के लिए दीर्घकालीन निगरानी आवश्यक है। वर्तमान में वन विभाग द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।"

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