
AIMIM Support BJP In Amravati: महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा से अपने अप्रत्याशित मोड़ों के लिए जानी जाती है, लेकिन हाल ही में अमरावती से आई खबरों ने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है। राज्य में नगर निकाय चुनावों (BMC और अन्य निगमों) के नतीजों के बाद सत्ता के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमरावती में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के बीच ‘अघोषित’ सहयोग की चर्चाओं ने पूरे सूबे में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।
अमरावती महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों में किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण सत्ता की चाबी निर्दलीयों और छोटे दलों के पास चली गई थी। इसी बीच स्थानीय स्तर पर कुछ ऐसे संकेत मिले जहां AIMIM के पार्षदों ने अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी रणनीति अपनाई जिससे भाजपा को लाभ पहुंचा। हालांकि, वैचारिक रूप से ये दोनों दल एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं, लेकिन स्थानीय निकायों में ‘अंकगणित’ अक्सर विचारधारा पर भारी पड़ जाता है।
अमरावती महानगरपालिका में हुए महापौर चुनाव में भाजपा के श्रीचंद तेजवानी महापौर और युवा स्वाभिमान पक्ष के सचिन भेंड़े उपमहापौर निर्वाचित हुए। दोनों प्रत्याशियों को बराबर 55-55 मत प्राप्त हुए। इस चुनाव में महायुति के सभी घटक दल भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (पवार गुट), शिवसेना (शिंदे गुट) और युवा स्वाभिमान पक्ष एकजुट होकर मैदान में उतरे। इसके साथ ही एआईएमआईएम की पार्षद मीरा कांबले ने भी महायुति के पक्ष में समर्थन देकर सबको चौंका दिया।
विजयी उम्मीदवारों को भाजपा के 25, युवा स्वाभिमान पक्ष के 15, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 11, शिंदे गुट की शिवसेना के 3 और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के 1 मत सहित कुल 55 वोट मिले। इस परिणाम के साथ राज्य स्तर की तरह ही महानगरपालिका में भी महायुति का दबदबा कायम हो गया।
इस घटनाक्रम पर राज्य की राजनीति में ‘बी-टीम’ का आरोप एक बार फिर चर्चा में आ गया है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह गठबंधन लोकतंत्र के साथ मजाक है। वहीं दूसरी ओर, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी भाजपा के साथ किसी भी आधिकारिक गठबंधन में नहीं है। उन्होंने अकोट और अमरावती जैसे क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं द्वारा लिए गए कुछ फैसलों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी बात कही है।
भाजपा के लिए अमरावती एक महत्वपूर्ण गढ़ रहा है। देवेंद्र फडणवीस और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पार्टी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेगी। फडणवीस ने स्थानीय नेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी ऐसे दल के साथ गठबंधन न करें जो पार्टी की मूल नीति के खिलाफ हो। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत यह है कि सत्ता हासिल करने की होड़ में स्थानीय स्तर पर ‘अदृश्य’ तालमेल की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ध्रुवीकरण इसी तरह जारी रहा, तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। अमरावती की यह हलचल केवल एक नगर निगम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की भावी राजनीति का ट्रेलर भी हो सकती है।






