
भारतीय रिजर्व बैंक लोन रिकवरी पर लाएगा सख्त गाइडलाइंस (सोर्स-सोशल मीडिया)
New RBI Monetary Policy Updates: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब बैंकों और NBFC द्वारा की जाने वाली लोन रिकवरी की मनमानी पर लगाम लगाने का बड़ा फैसला लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद घोषणा की है कि जल्द ही इसके लिए व्यापक ड्राफ्ट गाइडलाइंस पेश की जाएंगी। नए नियमों का उद्देश्य रिकवरी एजेंटों द्वारा की जाने वाली जोर-जबरदस्ती को रोकना और ग्राहकों के साथ होने वाले अनुचित व्यवहार को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके साथ ही बैंक काउंटरों पर होने वाली फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की मिस-सेलिंग को रोकने के लिए भी RBI काफी सख्त रुख अपनाने जा रहा है।
RBI ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में विभिन्न विनियमित संस्थाओं के लिए लोन रिकवरी और एजेंटों के व्यवहार को लेकर अलग-अलग निर्देश लागू हैं। केंद्रीय बैंक ने अब इन सभी पुराने नियमों की समीक्षा करने और एक समान सख्त दिशा-निर्देश जारी करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस कदम से बैंकों और NBFC को अब लोन वसूली के दौरान केवल कानूनी और सम्मानजनक तरीकों का ही उपयोग करना अनिवार्य होगा।
अक्सर देखा जाता है कि बैंक अपने कमीशन के लालच में ग्राहकों को ऐसे थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स बेच देते हैं जिनकी उन्हें कोई जरूरत नहीं होती। RBI ने कहा है कि अब बेचे जाने वाले प्रोडक्ट्स ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उनकी जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप ही होने चाहिए। मिस-सेलिंग को रोकने के लिए जल्द ही मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग और सेल्स को लेकर विस्तृत और व्यापक निर्देश जारी किए जाने वाले हैं।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 फरवरी को हुई बैठक में वर्तमान रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का ऐलान किया है। रेपो रेट को स्थिर रखने के साथ ही RBI का पूरा ध्यान अब कंज्यूमर प्रोटेक्शन यानी उपभोक्ता संरक्षण को और अधिक मजबूत करने पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए बेंचमार्क के तय होने से भविष्य में रिकवरी से जुड़े विवादों और कानूनी मुकदमों में बड़ी कमी आएगी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार नई कंप्लायंस गाइडलाइंस जारी होने के बाद कर्ज देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही काफी बढ़ जाएगी। अब बैंकों को अपने रिकवरी एजेंटों के व्यवहार की निगरानी करनी होगी और किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती के लिए बैंक ही जिम्मेदार होंगे। इससे न केवल ग्राहकों का बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा बल्कि वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता और अनुशासन भी सुनिश्चित हो सकेगा।
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RBI के इस कदम से आम आदमी को उन रिकवरी एजेंटों के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से मुक्ति मिलेगी जो अनुचित तरीकों का उपयोग करते हैं। इसके अलावा बैंकों द्वारा बेचे जाने वाले इंश्योरेंस और अन्य निवेश उत्पादों में पारदर्शिता आने से ग्राहकों का आर्थिक नुकसान भी काफी कम होगा। यह गाइडलाइंस वित्तीय सेवाओं के इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी और बड़ा कदम साबित होंगी।






