
Maharashtra teacher staff norms (सोर्सः सोशल मीडिया)
Amravati News: राज्य सरकार द्वारा शिक्षक स्टाफ मान्यता (संचमान्यता) के नए और संशोधित मानदंड लागू किए गए हैं। इन नए नियमों के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों के समायोजन के आदेश जारी किए गए हैं, जिससे राज्यभर में हजारों शिक्षक पद कम होने की आशंका जताई जा रही है।
नए मानकों का सबसे अधिक असर ग्रामीण, डोंगरी, दुर्गम, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कम छात्र संख्या वाले स्कूलों पर पड़ेगा। शासन ने 23 अक्टूबर 2025 को आधारभूत छात्र संख्या के आधार पर शैक्षणिक वर्ष 2025-26 की स्टाफ मान्यता को अंतिम रूप दिया है।
संशोधित नियमों में शिक्षक पद स्वीकृति के लिए छात्र संख्या की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे कई स्कूलों में शिक्षक अतिरिक्त ठहर रहे हैं। विशेष रूप से छठी से आठवीं कक्षा में इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा। जिन स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक 20 से कम विद्यार्थी हैं, वहां अब केवल एक ही शिक्षक पद स्वीकृत किया गया है। इससे विषय शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में समाप्त हो सकते हैं। इसका सबसे अधिक असर कोकण, गडचिरोली, अमरावती सहित डोंगरी और आदिवासी जिलों में देखने को मिलेगा।
प्राथमिक शिक्षक समिति के राज्याध्यक्ष विजय कोंबे ने कहा कि शिक्षा कानून के अनुसार स्कूलों में शिक्षक पद स्वीकृत होना आवश्यक है, लेकिन नए नियमों से ग्रामीण स्कूलों को नुकसान होगा। शिक्षकों का समायोजन तो हो जाएगा, लेकिन बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। छात्र संख्या के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्राथमिक शिक्षक समिति के राज्य प्रचार प्रमुख राजेश सावरकर ने कहा कि संशोधित स्टाफ मान्यता नियमों के कारण हजारों शिक्षक पद कम होने की स्थिति बन रही है। एक शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ सकते हैं। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार से वंचित होना पड़ सकता है। इसे लेकर पालक वर्ग जनहित याचिका दायर करने की तैयारी में है।
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मार्च 2024 के संशोधित आदेशानुसार अतिरिक्त ठहरने वाले शिक्षकों के समायोजन के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
ये निर्देश प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षण संचालकों द्वारा दिए गए हैं।






