
अमरावती न्यूज
Warud Forest Division: अमरावती वन विभाग के अंतर्गत आने वाले वरुड़ वन परिक्षेत्र में बाघ मृत अवस्था में पाया गया है। यह घटना मंगलवार, 3 फरवरी को वरुड़ के वाई सर्कल, पंढरी बीट के खंड क्रमांक -1010 में सामने आई। बाघ की मौत की खबर के बाद वनविभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। मृत बाघ का शव घटनास्थल पर मिलने के बाद वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।
बाघ की मृत्यु की सूचना मिलते ही वरुड़ के पशुधन अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजा गया। प्राथमिक जांच में पशु चिकित्सकों ने अनुमान व्यक्त किया है कि बाघ की मृत्यु 15 दिन पहले हो सकती है, लेकिन इसका असली कारण और मृत्यु का समय शव परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
मृत बाघ का शव परीक्षण राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया। शव परीक्षण के बाद बाघ के शरीर का अंतिम संस्कार भी घटनास्थल पर ही किया गया। कार्रवाई में वन विभाग के अधिकारी, वन कर्मचारी, पशु चिकित्सक, डॉग स्क्वॉड, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि और मानद वन्यजीव रक्षक शामिल थे।
यह घटना वन्यजीवों के संरक्षण के दृष्टिकोण से एक गंभीर मामला है, और इस बाघ की मौत के कारणों की गहराई से जांच की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या कोई अन्य बाहरी कारक जिम्मेदार हैं, इसकी जांच वनविभाग द्वारा की जा रही है।
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत इस मामले की जांच जारी है। सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जांच होगी।
वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों ने कहा है कि बाघों की मौत वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक गंभीर चिंता का विषय है और इस पर गहरी नजर रखने की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर कार्य करने की जरूरत है ताकि वन्यजीवों का जीवन सुरक्षित रह सके और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती दी जा सके।






