अमरावती मनपा चुनाव: चंद्रशेखर बावनकुले की पार्षदों को दो टूक, 'खराब परफॉर्मेंस' पर कटेगा टिकट!

Amravati Municipal Election को लेकर बीजेपी का कड़ा रुख! चंद्रशेखर बावनकुले ने साफ किया कि केवल अच्छे प्रदर्शन वाले पार्षदों को ही मिलेगा टिकट। क्या पुराने दिग्गजों का पत्ता कटेगा? पूरी खबर यहां पढ़ें।
Chandrashekhar Bawankule
चंद्रशेखर बावनकुले, फोटो- सोशल मीडिया
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Amravati Municipal Corporation Elections: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में आगामी नगर निगम (मनपा) चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के शहर पदाधिकारियों और प्रमुख कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक में पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर बड़े संकेत दिए हैं। बावनकुले ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन वर्तमान पार्षदों का प्रदर्शन पिछले कार्यकाल में असंतोषजनक रहा है, उनके टिकट पर पार्टी गंभीरता से पुनर्विचार करेगी। इस घोषणा के बाद से ही वर्तमान पार्षदों में खलबली मच गई है।

अमरावती मनपा के पिछले चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 45 पार्षद जिताए थे। उस समय नेतृत्व डॉ. सुनील देशमुख के हाथों में था, लेकिन उनके कांग्रेस में शामिल होने और उनके साथ करीब 10 समर्थकों के जाने से समीकरण बदल गए हैं। इसके अतिरिक्त, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे पदाधिकारियों पर भी भाजपा नेतृत्व की पैनी नजर है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, करीब 642 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी दावेदारी पेश की है, लेकिन टिकट उसे ही मिलेगा जो पार्टी के प्रति पूर्ण निष्ठा रखता हो।

भीतरघात और प्रभाग बदलने की कोशिश

चुनावों की घोषणा से पहले ही कई इच्छुक उम्मीदवारों ने अपने मूल प्रभाग को छोड़कर भाजपा के लिए 'सुरक्षित' माने जाने वाले क्षेत्रों में प्रचार शुरू कर दिया है। इसे लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ पदाधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर अपने करीबियों को टिकट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में शहर अध्यक्ष को शिकायतें भी भेजी गई हैं। कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी है कि केवल 'पैराशूट' उम्मीदवारों के बजाय जमीन पर काम करने वालों को मौका मिले।

45 सीटें बरकरार रखने की बड़ी चुनौती

भाजपा के लिए इस बार अपनी पुरानी 45 सीटों के आंकड़े को छूना या उसे पार करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। दलबदल और अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी नेतृत्व अब केवल जीतने वाले और साफ छवि वाले चेहरों पर दांव लगाना चाहता है। बावनकुले की इस चेतावनी ने साफ कर दिया है कि केवल पुराना कद काम नहीं आएगा, बल्कि जनता के बीच किए गए कार्यों की रिपोर्ट ही टिकट का असली आधार बनेगी। आगामी दिनों में टिकट वितरण को लेकर भाजपा के भीतर घमासान और तेज होने की संभावना है।

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