परमाणु ताकत बनाम छापामार लड़ाके: क्या तालिबान के जाल में फंस गया है पाकिस्तान?

Taliban Cross Border Attacks : कई महीनों से पाकिस्तान और तालिबान के बीच जारी तनाव अब आक्रामक रूप ले चुका है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के अंदर एयरस्ट्राइक की है। दर्जनों निर्दोष नागरिक मारे गए।
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हथियार के साथ सेना एवं लड़ाकू। इमेज-एआई।
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Pakistan Afghanistan Tension News : दक्षिण एशिया के इस अशांत क्षेत्र में तनाव अब उस दहलीज पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता खतरनाक नजर आता है। रविवार तड़के पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के सीमाई इलाकों में सात अलग-अलग ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इस हमले में दर्जनों आम नागरिकों के मारे जाने की खबर है।

हालांकि, पाकिस्तान इसे 'आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक' करार दे रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं और पस्त पड़ती अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने की एक हताश कोशिश है।

तालिबान की समय पर जवाब देने की हुंकार

पाकिस्तान की इस कार्रवाई ने सोए हुए शेर को छेड़ने जैसा काम किया है। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि पाकिस्तान ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है और इसका जवाब सही समय और सही जगह पर दिया जाएगा। यह महज एक धमकी नहीं है; इतिहास गवाह है कि अफगान लड़ाकों ने दुनिया की महाशक्तियों को अपनी छापामार युद्ध नीति से घुटने टेकने पर मजबूर किया है। अब सवाल यह है कि क्या परमाणु संपन्न पाकिस्तान इन लड़ाकों के सामने टिक पाएगा?

पाकिस्तान का विक्टिम कार्ड

हैरानी की बात यह है कि हमला करने के बाद अब पाकिस्तान खुद को पीड़ित बताकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने झोली फैला रहा है। इस्लामाबाद का दावा है कि हालिया आत्मघाती हमले (इस्लामाबाद, बाजौर और बन्नू) टीटीपी (TTP) और ISKP द्वारा किए गए, जिनका रिमोट कंट्रोल अफगानिस्तान में है। पाकिस्तान अब दुनिया से दोहा समझौते का पालन कराने की गुहार लगा रहा है।

विशेषज्ञों का तर्क

दोहा समझौता अमेरिका और तालिबान के बीच हुआ था। पाकिस्तान इसमें कोई पक्षकार नहीं था, फिर भी वह अमेरिका का साथ पाने के लिए इस समझौते को ढाल बना रहा है। यह पाकिस्तान की कूटनीतिक कमजोरी को दर्शाता है।

रणनीतिक गतिरोध

पाकिस्तान की सेना अब एक दोराहे पर खड़ी है। एक तरफ सीमा पर तालिबान की तोपें तैनात हो रही हैं, तो दूसरी तरफ घर के भीतर टीटीपी के लड़ाके कोहराम मचा रहे हैं। तालिबान के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के पास उसकी परमाणु साख और बिखरती हुई साख दांव पर लगी है। यदि तालिबान ने जवाबी हमला किया, तो पाकिस्तान के पास अंतरराष्ट्रीय गुहार लगाने के अलावा शायद ही कोई ठोस रास्ता बचे।

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