
असदुद्दीन ओवैसी व चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: सोशल मीडिया)
BJP AIMIM Alliance Controversy: अकोला जिले के अकोट में AIMIM-भाजपा गठबंधन मुद्दे के बाद अब अमरावती जिले की अचलपुर नगर परिषद में सत्ता कायम करने के मामले में भाजपा और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के गठबंधन की चर्चा जोरों पर चली। इससे अमरावती जिले राजनितिक भूचाल आ गया है। वहीं विरोधियों ने दोनों ही पार्टियों को ट्रोल करना भी शुरू कर दिया था। यह मामला गुरुवार को दिन भर अनेक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चलता रहा।
हालांकि अचलपुर की नगराध्यक्ष रूपाली माथने ने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पत्र भेज कर स्पष्ट किया है कि इस तरह का कोई भी गठबंधन नहीं है। यह सिर्फ सोशल मीडिया पर फैलाई गई गलत अफवा है। तो वही संबंधित पक्षों ने भी इस पर अपना खुलासा बयां किया।
उल्लेखनीय है कि अचलपुर नगर परिषद में कांग्रेस 15, एआईएमआईएम के 3, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2 तथा 1 निर्दलीय सहित कुल 21 सदस्य है। उसी तरह प्रहार जनशक्ति पार्टी के 2, भाजपा के 10 और 8 अपक्ष निर्दलीय सदस्य हैं। इसके अलावा, विभिन्न आघाड़ियों के गुट भी सक्रिय हैं, जिनमें कांग्रेस आघाड़ी, अचलपूर विकास आघाड़ी, अचलपूर परतवाडा विकास आघाड़ी और भाजपा स्वतंत्र गुट शामिल हैं।
मिली जानकारी के अनुसार नगराध्यक्ष रूपाली माथने ने मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को भेजे अपने पत्र में कहा है कि अचलपुर नगर परिषद में एआईएमआईएम का कोई अधिकृत गुट अस्तित्व में नहीं है। भाजपा हिंदुत्ववादी विचारधारा वाली पार्टी है और उसने एमआईएम के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है। पार्टी के वरिष्ठों को भ्रमित करने के लिए ऐसी अफवाएं फैलाई जा रही है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी एमआईएम पर आरोप लगाते हुए कहा है कि एमआईएम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुस्लिम पार्षदों ने अपने ही समाज के निर्वाचित प्रतिनिधियों को धोखा देते हुए भाजपा के साथ युति की, जिसके चलते कांग्रेस के 15 नगरसेवक समिति से बाहर हो गए। एमआईएम खुद को अल्पसंख्यकों की हितैषी पार्टी बताती रही है। जबकि यह केवल राजनीतिक गठजोड़ नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जिन दलों पर अल्पसंख्यकों के हक की रक्षा की जिम्मेदारी थी। वही दल भाजपा की सत्ता राजनीति का हिस्सा बन गए और कांग्रेस के मुस्लिम नगरसेवकों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
कांग्रेस का आरोप है कि एमईएम और राकांपा ने A टीम–B टीम की भूमिका निभाते हुए भाजपा को मजबूत करने का काम किया, जबकि नुकसान सीधे उस समाज को हुआ, जिसने कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुनकर भेजा था।
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इन सब मामले में एमआईएम की ओर से जिलाध्यक्ष सै। मुजीब ने कहा कि भाजपा से एमआईएम की कभी गठबंधन नही हो सकता। यह सब कांग्रेस व उसकी सहयोगी पार्टी व्दारा एमआईएम को बदनाम करने के लिए साजिश की जा रही है। एमआईएम ने भाजपा को कोई समर्थन नहीं दिया है। 3 एमआईएम, 3 निर्दलीय 2 राष्ट्रवादी के पार्षदों का एक गुट बनाया गया है। उसकी बुनियाद पर उन्हें एक समिति मिली है।
अमरावती कांग्रेस जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख ने कहा कि चुनाव के दौरान धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यकों के मुद्दे और भाजपा की नीतियों का विरोध करने वाले यही पार्षद अब सत्ता के लिए भाजपा के साथ जा बैठे हैं, जिसको लेकर तीखी आलोचना हो रही है। शहर में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि “वोट मुस्लिम समाज के, लेकिन सत्ता भाजपा के हाथ”यह स्थिति जनता के विश्वास के साथ सीधा धोखा है। जिन प्रतिनिधियों ने मुस्लिम समाज के मतों और भरोसे के दम पर चुनाव जीता, उनका इस प्रकार भाजपा के साथ जाना जनादेश के साथ विश्वासघात है। जनता इसका खुलकर जवाब मांगेगी और इसका राजनीतिक असर आगे दिखाई देगा।






