कौन हैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा? जिनकी अदालत से केजरीवाल ने केस हटाने की मांग की, भाजपा से भी जोड़ा

Justice Swarana Kanta Sharma: दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर 'आप' ने निष्पक्षता के सवाल उठाए, साथ ही केजरीवाल ने उनकी बेंच से केस हटाने की मांग की है।
Who is Justice Swarana Kanta Sharma
जस्टिस शर्मा, केजरीवा (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Who Is Justice Swarana Kanta: आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर भरोसा नहीं है। वह उनसे जुड़े केस की सुनवाई कर रही हैं। जिसके चलते केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टीस को पत्र लिखकर जज बदलने की मांग उठाई है।

दरअसल, सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील किया जिसमें अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया था। अब इसी केस की हाईकोर्ट में सुनवाई कर रहीं है जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा।

कौन हैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा?

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की शिक्षा और न्यायिक करियर की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में बीए (ऑनर्स) किया साल 1991 में एलएलबी और 2004 में एलएलएम की डिग्री भी हासिल की। लॉ के क्षेत्र के अलावा उनके पास मार्केटिंग मैनेजमेंट, विज्ञापन और जनसंपर्क में डिप्लोमा भी है। साल 2025 में चार साल के शोध के बाद उन्होंने न्यायिक शिक्षा पर तुलनात्मक अध्ययन विषय पर पीएचडी प्राप्त की।

24 साल की उम्र में बनी मजिस्ट्रेट

न्यायमूर्ति शर्मा 24 साल की उम्र में मजिस्ट्रेट बनीं और 35 साल की उम्र में सत्र न्यायाधीश बन गईं। उन्होंने दिल्ली की विभिन्न अदालतों में विशेष न्यायाधीश (सीबीआई), परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश और महिला न्यायालय सहित कई अहम पदों पर कार्य किया। नवंबर 2019 में वह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनीं और 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट की जज नियुक्त हुईं। उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए चार किताबें भी लिखी हैं।

केजरीवाल ने पत्र में क्या कहा?

अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका को किसी ‘निष्पक्ष बेंच’ में ट्रांसफर करने की मांग की है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट उनके आदेश पलट चुका है। केजरीवाल ने निष्पक्ष सुनवाई पर आशंका जताई है।

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