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107 साल पुराने जमीन विवाद पर भड़का गुस्सा, श्रीरामपुर में किसानों का पुलिस स्टेशन को घेराव
Shrirampur Farmers Protest: महाराष्ट्र के श्रीरामपुर तालुका में 107 साल पुराने जमीन विवाद को लेकर सैकड़ों किसानों ने पुलिस स्टेशन के बाहर उग्र प्रदर्शन किया, जहां महिलाओं ने चूल्हा जलाकर विरोध जताया।
- Written By: आंचल लोखंडे

Shrirampur Farmers Protest (सोर्सः सोशल मीडिया)
Shrirampur Land Dispute: कोर्ट का फैसला अपने पक्ष में होने और कैबिनेट की मंज़ूरी के बावजूद, अपनी हक की ज़मीन का सातबारा पर ट्रांसफर न होने से नाराज़ श्रीरामपुर तालुका के किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शनिवार को सैकड़ों किसानों ने श्रीरामपुर शहर के पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया और ‘जेल भरो’ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। खास बात यह है कि प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ़ नारे लगाए बल्कि पुलिस स्टेशन के दरवाज़े पर डेरा डाल दिया, जिससे प्रशासन सकते में आ गया है।
यह मामला 107 साल पहले (ब्रिटिश काल) का है। उस समय की ब्रिटिश सरकार ने रेवेन्यू बकाया या दूसरे टेक्निकल कारणों का हवाला देकर किसानों की ज़मीनों को सरकारी रिकॉर्ड में ‘अकारी पड़ित’ के तौर पर दर्ज कर लिया था। आज़ादी के बाद भी ये ज़मीनें असली मालिकों या उनके वारिसों को वापस नहीं की गई हैं। श्रीरामपुर तालुका के नौ गांवों के करीब 12 से 13 हज़ार किसान इससे प्रभावित हैं।
फ़ैसले को लागू करने में आनाकानी
पीढ़ियों से इन ज़मीनों पर खेती करने के बावजूद, टेक्निकली ये सरकार के पास हैं, इसलिए किसानों को न तो लोन मिलता है और न ही उन्हें सरकारी योजनाओं का फ़ायदा मिल पाता है। किसान नेता एडवोकेट अजित काले ने इसके ख़िलाफ़ कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि ये ज़मीनें किसानों की हैं। राज्य कैबिनेट ने भी डेढ़ साल पहले ज़मीनें वापस करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी थी। लेकिन, मंत्रालय में प्रशासन और स्थानीय राजस्व विभाग इस फ़ैसले को लागू करने में आनाकानी कर रहे हैं।
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आंदोलन का अनोखा ‘खाना बनाने-बढ़ाने’ वाला रवैया
महिलाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को हमेशा की तरह जोश से भरा बना दिया। चिलचिलाती धूप में, महिला प्रदर्शनकारियों ने थाने के दरवाज़े पर ही चूल्हा जलाया, घर से लाई लकड़ी और गोबर के उपले जलाए और धुआं किया। उन्होंने वहां आटा गूंथा, रोटी बनाई और सब्ज़ियां पकाईं। महिलाओं ने अपना इरादा बताया कि जब तक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी नहीं हो जाता, वे यहां से नहीं हटेंगी। दरवाज़े पर जल रहे चूल्हे ने पुलिस और तहसील प्रशासन को परेशानी में डाल दिया है।
धोखाधड़ी होने पर ‘टेकओवर मूवमेंट’ की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एडवोकेट अजित काले ने बताया कि यह हमारा दूसरा आंदोलन है। पहले भी हमने ‘सेल्फ-टॉर्चर’ मूवमेंट करके खुद को परेशान किया था, लेकिन सरकार नहीं जागी। अब हम डिसाइडिंग रोल में हैं। हम अब सरकारी ऑफिस के चक्कर नहीं लगाएंगे। सरकार खुद यहां आकर हमारा मामला सुलझाए। अगर इस बार भी धोखाधड़ी हुई तो अगला कदम ‘टेकओवर मूवमेंट’ होगा। किसान खुद अपनी जमीन पर कब्जा करेंगे और फिर जो भी स्थिती बनेगी, उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
दादा-परदादाओं की लड़ाई
श्रीरामपुर तालुका के जिन नौ गांवों की जमीनें शामिल हैं, वहां की जिंदगी इस आंदोलन से प्रभावित हुई है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं। हमारे दादा-परदादाओं ने यह लड़ाई शुरू की थी, अब हमारी अगली पीढ़ी का भविष्य अंधेरे में नहीं रहना चाहिए, ऐसी भावनाएं प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रकट कीं। प्रदर्शन करने वाले अपने साथ गाय, बछड़े, बकरी और भेड़ लाए थे।
Shrirampur farmers land dispute protest police station 107 year old land transfer issue
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