किसानों को खून के आंसू रुला रही प्याज की कीमत, 8 रुपए प्रतिकिलो पहुंचा भाव, ठप पड़े निर्यात ने तोड़ी कमर

Maharashtra Onion News: वैश्विक युद्ध और निर्यात ठप होने से प्याज की कीमतें 8 रुपए प्रतिकिलो तक गिरीं। घटी हुई कीमत से लासलगांव और वाशी मंडी में किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
Onion Price Drop Maharashtra
Onion Price Drop Maharashtra प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
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Onion Price Drop Maharashtra: महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों के लिए एक बार फिर संकट की स्थिति पैदा हो गई है। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव और नवी मुंबई की वाशी एपीएमसी (APMC) में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसानों को मिलने वाला थोक भाव महज 8 रुपये से 12 रुपये प्रति किलो तक सिमट गया है, जिससे खेती की लागत निकालना भी उनके लिए दूभर हो गया है।

लाल प्याज के बाद अब गर्मियों वाली (यूनानी) प्याज की कीमतों में आई यह गिरावट किसानों की कमर तोड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंदी के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और केंद्र सरकार की खरीद नीतियों में बदलाव मुख्य कारण हैं।

निर्यात पर 'युद्ध' की मार

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने भारतीय प्याज निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। खाड़ी देशों में मांग कम होने के कारण व्यापारियों के पास प्याज का स्टॉक जमा हो गया है। सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स की है; जो शिपिंग कंटेनर पहले 600 डॉलर में उपलब्ध थे, उनका किराया अब बढ़कर 6,500 डॉलर तक पहुँच गया है। निर्यात महंगा होने के कारण विदेशी बाजारों में भारतीय प्याज की प्रतिस्पर्धात्मकता खत्म हो गई है।

सरकारी खरीद का लक्ष्य घटा

घरेलू स्तर पर भी स्थितियाँ किसानों के विपरीत हैं। इस वर्ष NAFED और NCCF के माध्यम से होने वाली सरकारी खरीद का लक्ष्य 5 लाख मीट्रिक टन से घटाकर केवल 2 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थानीय प्याज की पैदावार अच्छी होने के कारण महाराष्ट्र के प्याज की अंतर्राज्यीय मांग में भी कमी आई है।

थोक और खुदरा भाव में बड़ा अंतर

वाशी मंडी में शनिवार को थोक भाव भले ही 8-12 रुपये रहा हो, लेकिन मुंबई के खुदरा बाजारों में आम जनता को प्याज अब भी 20 से 24 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि बिचौलिए और खुदरा विक्रेता मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि उत्पादन करने वाले 'बलिराजा' (किसान) को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस समय कीमतें लगभग 50 प्रतिशत कम हैं। व्यापारियों को आशंका है कि यदि मध्य-पूर्व में युद्ध की स्थिति जारी रहती है और निर्यात सुचारू नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में कीमतें और गिर सकती हैं।

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