महाराष्ट्र के अहमदनगर रेलवे स्टेशन का बदला गया नाम, रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव ने की घोषणा

महाराष्ट्र सरकार ने अहमदनगर जिले का नाम बदलकर अहिल्यानगर करने को मंजूरी दे दी है। हालांकि अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। लेकिन, अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मंजूरी रेल मंत्री ने पहले ही दे दी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का ऐलान किया।
अहमदनगर रेलवे स्टेशन अब अहिल्यानगर से जाना जायेगा, रेल मंत्री की घोषणा
रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव ने की अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम अहिल्यानगर करने की घोषणा (सोर्स: सोशल मीडिया)
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अहमदनगर: महाराष्ट्र सरकार ने अहमदनगर जिले का नाम बदलकर अहिल्यानगर करने को मंजूरी दे दी है। हालांकि अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। लेकिन, अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मंजूरी रेल मंत्री ने पहले ही दे दी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नया नाम अब अहिल्यानगर करने को मंजूरी दी जा रही है। रेल मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही अहमदनगर रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर जल्द ही अहिल्यानगर नाम नजर आएगा।

अहमदनगर जिला पश्चिमी महाराष्ट्र का प्रवेश द्वार है। इस जिले का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। अहमदनगर, निजामशाही द्वारा बसाया गया शहर, जो निजामशाही की राजधानी भी थी। उस समय इस शहर की तुलना कैरोऔर बगदाद के समृद्ध शहरों से की जाती थी। इ.स. 1486 में मलिक अहमद निज़ामशाह बहमनी साम्राज्य के प्रधान मंत्री बने।

पंद्रहवीं शताब्दी के अंत में यानी 1486 में तत्कालीन बहमनी साम्राज्य को पांच भागों में विभाजित किया गया था। इससे बाहर निकलने वाले मलिक अहमदशहा बहिरी यह निज़ाम शहा ने इ.स. 1490 में उन्होंने सीना नदी के किनारे भिंगार के पूर्व शहर के पास एक नया शहर बनाना शुरू किया। इसी नाम पर शहर का नाम अहमदनगर रखा गया।

अहिल्या देवी होल्कर का जन्म अहमदनगर में हुआ था

सत्तारूढ़ दल भाजपा पर आरोप लगते है कि उनका राजनीतिक एजेंडा भारत पर आक्रमण करने वाले मुस्लिम शासकों द्वारा दिए गए शहरों के नामों को बदलना है। इसके मुताबिक अब तक कई शहरों के नाम बदले जा चुके हैं। इसमें अहमदनगर जिला भी शामिल है। लेकिन, पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर का जन्म अहमदनगर जिले के जामखेड तहसील के चौंडी में हुआ था। वह इंदौर के मल्हारराव होल्कर की बहू हैं।

मल्हार राव के बाद अहिल्या देवी ने मालवा राज्य की महारानी के रूप में लगभग 28 वर्षों तक राज्य पर शासन किया। इस काल में उन्होंने पूरे देश में धर्मशालाएं, मंदिर, कुएं, बारवं, अनेक भोजनालय खुलवाये। एकनाथ शिंदे की सरकार ने इस जिले को ऐसे ऐतिहासिक शख्सियत का नाम देने का फैसला किया।

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