पिछले 6 महीने में 145 लोग जिंदा जले...अब जागी मोदी सरकार, गडकरी बोले- माफी या अनदेखी मूड में नहीं

Sleeping Buses Fire Cases: देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और स्लीपर बसों को बनाने में अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। जानें नितिन गडकरी ने क्या कुछ कहा
nitin gadkari on sleeping buses fire cases
नितिन गडकरी (Image- Social Media)
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Nitin Gadkari on Sleeper Bus Fire Cases: देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और स्लीपर बसों को बनाने में बरती जा रही अनियमितताओं को रोकने के लिए केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सख्त कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। इसके तहत गडकरी ने कहा है कि कुछ मामलों की जांच के लिए सीबीआई से मदद ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट बस बॉडी बिल्डरों (वेंडरों) द्वारा बसों का निर्माण करते समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी, फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में लापरवाही और अन्य गड़बड़ियों के संदेह को देखते हुए सीबीआई से जांच की सिफारिश की जाएगी।

जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई

गडकरी ने कहा कि हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में कमी की बजाय वृद्धि हो रही है। उन्होंने पिछले साल राजस्थान और अन्य राज्यों में स्लीपर बसों में आग लगने की पांच से छह घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं में 145 लोग जिंदा जल गए। गडकरी ने साफ शब्दों में कहा कि हम किसी भी प्रकार की माफी या अनदेखी करने के मूड में नहीं हैं और इन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से पूछा है कि इनमें किसे जिम्मेदार ठहराया जाए और किस स्तर पर लापरवाहियां बरती गईं। उन्होंने कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वी2वी (Vehicle-to-Vehicle) सुरक्षा फीचर

गडकरी ने यह भी बताया कि गाड़ियों के आपस में टकराने से बचने के लिए वी2वी (Vehicle-to-Vehicle) सुरक्षा फीचर पर काम किया जा रहा है। इस तकनीक में गाड़ियां एक-दूसरे से वायरलेस तरीके से संवाद करती हैं और स्पीड, अचानक ब्रेक लगाना, खड़ी गाड़ी या गाड़ी की लोकेशन जैसी जानकारी साझा करती हैं। इससे टक्करों को रोका जा सकता है। यह तकनीक अमेरिका, यूरोप, जापान और चीन में नई कारों में अनिवार्य करने की दिशा में है। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने बताया कि इस सिस्टम के लिए टेलीकॉम मंत्रालय फ्री में स्पेक्ट्रम देगा, और इस साल के अंत तक इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। यह सिस्टम न केवल कारों, बल्कि बसों और ट्रकों जैसे बड़े वाहनों में भी लगाया जाएगा। गाड़ियों में इस सिस्टम को लगाने के लिए कंपनियों को 4,000 से 6,000 रुपये का खर्च आ सकता है।

प्राइवेट बस वेंडरों को स्लीपर बस बनाने से रोकना

गडकरी ने घोषणा की कि अब से प्राइवेट बस वेंडर स्लीपर बसें नहीं बना सकेंगे। राजस्थान और अन्य राज्यों में पिछले साल स्लीपर बसों में आग लगने से हुई मौतों के बाद इस कदम की आवश्यकता महसूस की गई। इन बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी, जिसके कारण यह हादसे हुए। अब से इन बसों को चेसिस बनाने वाली कंपनियां ही तैयार करेंगी। गडकरी ने कहा कि इस फैसले के बाद नई स्लीपर बसों में सुरक्षा से जुड़े कई और फीचर्स जोड़े जाएंगे।

2030 तक सड़क दुर्घटनाओं को 50% कम करने का लक्ष्य

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए मंत्रालय ने एक योजना बनाई है, जिसके तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य है। इसके लिए देश के 100 जिलों में “Zero Fatality District” योजना पर काम किया जा रहा है। इसमें राज्य पुलिस-प्रशासन और ट्रांसपोर्ट विभाग के सहयोग से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उपायों पर काम किया जाएगा। साथ ही, ब्लैक स्पॉट पर पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा और ओवर स्पीडिंग और सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों पर अंकुश लगाया जाएगा।

सड़क नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

गडकरी से यह सवाल पूछा गया कि सड़क पर नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को राज्य पुलिस और ट्रांसपोर्ट विभाग के कर्मचारी रिश्वत लेकर क्यों छोड़ देते हैं। इसके जवाब में नितिन गडकरी और सचिव उमाशंकर ने माना कि यह एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि इस पर काम किया जा रहा है और अब तकनीकी उपायों के जरिए ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो।

कैशलेस योजना की शुरुआत

गडकरी ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 मार्च 2024 को चंडीगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों के लिए एक कैशलेस योजना की शुरुआत करेंगे। इस योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये का इनाम मिलेगा और घायल को सात दिन तक के इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपये की सहायता सरकार द्वारा दी जाएगी। गडकरी ने बताया कि यह योजना राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू की जाएगी और सभी अस्पतालों में इसे लागू किया जाएगा। गडकरी ने यह भी बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गई है, जो मोटर वाहन एक्ट (एमवी एक्ट) का अध्ययन करेगी और इस पर अपने सुझाव देगी।

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