Mumbai: बिल्डरों और घर खरीदारों को राहत, मोफा-महारेरा के दोहरे कानून का भ्रम हुआ खत्म

Maharashtra सरकार ने निर्माण क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए मोफा और महारेरा के दायरे को स्पष्ट कर दिया है। छोटे प्रोजेक्ट्स पर केवल मोफा और 5000 वर्गफुट से बड़े प्रोजेक्ट्स पर सिर्फ महारेरा लागू होगा।
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महारेरा (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai News In Hindi: राज्य सरकार ने निर्माण क्षेत्र को राहत देते हुए एक अहम निर्णय लिया है। अब यदि किसी पूर्ण निर्माण परियोजना में आठ फ्लैट या 5000 वर्गफुट तक का निर्माण है, तो उस पर केवल 'मोफा' (महाराष्ट्र ओनरशिप फ्लैट एक्ट) लागू होगा।

वहीं, 5000 वर्गफुट से अधिक क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट्स पर सिर्फ 'महारेरा' (महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट) ही लागू रहेगा। राज्य सरकार ने शीतकालीन अधिवेशन में दिए गए आश्वासन के मुताबिक यह बदलाव किया है।

इस फैसले से घर खरीदारों के साथ-साथ बिल्डरों और डेवलपर्स को भी सीधा फायदा होगा। अब तक राज्य में 'मोफा' और 'महारेरा' दोनों कानून एक साथ लागू थे।

महारेरा के तहत छोटे प्रोजेक्ट्स को छूट थी, लेकिन उन पर 'मोफा' लागू रहने से कई मामलों में दोनों कानून प्रभावी हो जाते थे। इससे डेवलपर्स, हाउसिंग सोसायटियों और फ्लैट धारकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जो अब दूर होने की संभावना है।

'डीम्ड कन्वेन्स' की व्यवस्था बरकरार

सरकार ने 'मोफा' कानून में संशोधन करते हुए 'मानीव अभिहस्तांतरण की अहम व्यवस्था को कायम रखा है। इससे इमारत के नीचे की जमीन और सामूहिक सुविधाओं पर निवासियों का स्वामित्व अधिकार सुरक्षित रहेगा। यदि डेवलपर कन्वेन्स न दे, तो भी निवासियों के पास कानूनी विकल्प उपलब्ध रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला बन गया आधार

'मोफा' कानून को लेकर मराठी बिल्डर्स एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत स्पष्ट किया कि नया कानून लागू होने के बाद पुराने कानून का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं रह सकता।

आरक्षित जमीन पर विकास को रफ्तार

सरकार ने 'कंस्ट्रक्शन अमेनिटी टीडीआर देने का प्रावधान किया है। अब नगर निगम क्षेत्र में आरक्षित जमीन का विकास यदि जमीन मालिक के अलावा कोई अन्य डेवलपर करता हैस तो उसे इसके बदले टीडीआर मिलेगा।

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