
शीतकालीन अधिवेशन पर निकाला जाएगा ‘महामोर्चा’ (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Ahilyanagar Dharna 2025: महाराष्ट्र राज्य के सरकारी-अर्धसरकारी, शिक्षक-गैरशिक्षक कर्मचारियों की समन्वय समिति, अहिल्यानगर विभाग की ओर से लंबित मांगों को लेकर मंगलवार सुबह जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एक घंटे का “प्रदर्शन” किया गया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही, शीतकालीन अधिवेशन में ‘महामोर्चा’ निकालने की घोषणा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत में दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में कार में हुए भीषण विस्फोट में मारे गए नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लंबित मांगों को लेकर सरकारी-अर्धसरकारी कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की।
इस आंदोलन में समिति के जिला संयोजक रावसाहेब निमसे, जिला सरकारी कर्मचारी केंद्रीय संगठन के अध्यक्ष सुभाष तळेकर, सरचिटणीस (महासचिव) रावसाहेब निमसे, कार्याध्यक्ष मुकुंद शिंदे, उपाध्यक्ष विलास पेद्राम, विजय काकडे, अशोक मासाळ, सहचिटणीस संदिपान कासार, संगठन मंत्री श्रीमती व्ही. डी. नेटके, सयाजी वाव्हळ, सारंग राऊत, दत्तात्रय पानसरे, प्रभाकर घोरपडे, अशोक मोळके, रमेश देशमुख, बी. एस. दंडवते आदि शामिल हुए।
सुभाष तळेकर ने कहा कि पहले धारा 353 जमानती थी, लेकिन उसमें संशोधन के कारण सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। उनके ऊपर हमले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार से अपनी मांगें मनवाने के लिए कर्मचारियों के पास संगठन ही एकमात्र रास्ता है। सरकार ने सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता है, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।
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रावसाहेब निमसे ने कहा कि पहले से तय 11 नवंबर का ‘प्रतीकात्मक संप’ अतिवृष्टि से किसानों पर आए संकट और चुनाव आचारसंहिता के कारण स्थगित किया गया था, लेकिन आंदोलन की दिशा और तीव्रता बरकरार रखी जाएगी। सरकारी कर्मचारी केवल अपने अधिकारों के लिए नहीं लड़ रहे, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए 17 लाख कर्मचारियों ने बाढ़ग्रस्त किसानों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि में एक दिन का वेतन दान किया है।
उन्होंने आगे कहा कि 3% महंगाई भत्ता देने की भी संगठन की मांग है। समन्वय समिति ने घोषणा की है कि दिसंबर 2025 में नागपुर में होने वाले शीतकालीन अधिवेशन के दौरान ‘महामोर्चा’ निकाला जाएगा। 11 नवंबर के बाद समिति की राज्यस्तरीयबैठक आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। सभी जिलों के सरकारी, अर्धसरकारी, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों से इस प्रदर्शन में एकजुट होकर भाग लेने और आंदोलन को सफल बनाने की अपील की गई है।






