'पाकिस्तान जाकर 20 बच्चे पैदा करो', नवनीत राणा और ओवैसी में जुबानी जंग तेज, मचा सियासी बवाल

Owaisi Vs Navneet Rana: बीजेपी नेता नवनीत राणा के चार बच्चे वाले बयान पर सियासत तेज हो गई है। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के जवाब के बाद राणा ने उनकी नागरिकता और पार्टी मान्यता रद्द करने की मांग की।
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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी और नवनीत राणा (डिजाइन फोटो)
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Navneet Rana Statement: महाराष्ट्र की राजनीति में 'जनसंख्या' और 'राष्ट्रवाद' के मुद्दे पर बीजेपी नेता नवनीत राणा और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के बीच जुबानी जंग चरम पर है। राणा ने हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी थी, जिस पर ओवैसी के तंज के बाद अब राणा ने पलटवार किया है।

यह पूरा विवाद नवनीत राणा के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने हिंदुओं से देश की सुरक्षा के लिए कम से कम चार बच्चे पैदा करने की अपील की थी। राणा का तर्क था कि जब दूसरे समुदाय के लोग बड़ी संख्या में बच्चे पैदा कर रहे हैं, तो हिंदुओं को भी पीछे नहीं रहना चाहिए। इस पर पलटवार करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने अमरावती की एक रैली में मजाक उड़ाते हुए कहा था, "आप चार नहीं, आठ बच्चे पैदा करो, हमें क्या फर्क पड़ता है?"

ओवैसी को पाकिस्तान भेज देना चाहिए: नवनीत राणा

असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी से नाराज नवनीत राणा ने अब सीधे उनकी भारतीय नागरिकता पर सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि जो व्यक्ति देश के संविधान का सम्मान नहीं करता, उसे भारत में रहने का कोई हक नहीं है। राणा ने मांग की कि ओवैसी को पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए, ताकि वे वहां जाकर जितने चाहें (10 या 20) बच्चे पैदा कर सकें।

संविधान और 'भारत माता की जय' पर घेरा

नवनीत राणा ने ओवैसी की देशभक्ति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एक सांसद होने के बावजूद वे बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन क्यों नहीं करते। उन्होंने कहा "ओवैसी, हमें पता है आपके दिमाग में क्या चल रहा है। आप संसद सदस्य हैं, फिर भी न तो 'भारत माता की जय' कहते हैं और न ही 'वंदे मातरम्'। अगर आपको संविधान में यकीन नहीं है, तो आप इस देश को क्या मानते हैं?"

चुनाव आयोग से AIMIM की मान्यता रद्द करने की मांग

अपने हमले को आगे बढ़ाते हुए नवनीत राणा ने चुनाव आयोग से अपील की है कि AIMIM की राजनीतिक दल के रूप में मान्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि जो नेता और पार्टी देश की अखंडता और प्रतीकों का सम्मान नहीं करती, उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होना चाहिए। इस बयान के बाद महाराष्ट्र के आगामी महानगरपालिका चुनावों में ध्रुवीकरण और बढ़ने की संभावना है।

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