जबलपुर के बरगी बांध की नहर टूटी: आधा दर्जन गांवों में घुसा पानी, सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद, बाढ़ का खतरा बढ़ा

Jabalpur Bargi Dam Canal Damage: जबलपुर में बरगी बांध की दाईं तट नहर क्षतिग्रस्त होने से तकरीबन आधा दर्जन गांवों पानी भर गया। नहर टूटने के बाद सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो गई। 
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जबलपुर के बरगी बांध की नहर, फोटो- सोशल मीडिया
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Bargi Bank Canal Breach: मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा सामने आया। बरगी बांध की दाईं तट नहर अचानक डैमेज हो गई, जिससे पानी का तेज बहाव आसपास के गांवों और खेतों में घुस गया। इस घटना के चलते सैकड़ों किसानों की खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं और दर्जनों गांवों के लोग अब भी बाढ़ की आशंका को लेकर दहशत में हैं।

जबलपुर जिले के बरगी थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सगड़ाझपनी के पास यह घटना रविवार को सामने आई। जैसे ही नहर क्षतिग्रस्त हुई, पानी का बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते आसपास के खेतों में पानी भर गया। सूत्रों के अनुसार, इस जलभराव की चपेट में पांच प्रमुख गांव आए हैं, जहां सैकड़ों किसानों की मेहनत से उगाई गई खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। अचानक आई इस मुसीबत से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और लोग सुरक्षिच जगह की तलाश में इधर-उधर भागने लगे।

तत्काल रोक दी गई पानी की सप्लाई

नहर टूटने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, नहर विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। एसडीएम अभिषेक सिंह ने बताया कि नहर के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही बांध से आने वाले पानी को तुरंत बंद करवा दिया गया। अधिकारियों की मानें तो जलस्तर को कम करने के लिए 11, 17 और 25 किलोमीटर के विभिन्न पॉइंट्स से भी पानी रिलीज किया गया ताकि नहर में जमा पानी जल्द खत्म हो सके। राहत की बात यह है कि इस पूरी घटना में अब तक किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।

मंत्री और कलेक्टर के निर्देश: फसलों के नुकसान का होगा सर्वे

पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से विस्तृत चर्चा की है। मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रभावित गांवों में फसलों को हुए नुकसान का शीघ्र सर्वे किया जाए और किसानों को जल्द से जल्द राहत राशि प्रदान की जाए। वर्तमान में कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासनिक अमला खेतों का निरीक्षण कर नुकसान का वास्तविक आकलन करने में जुटा है।

जर्जर नहर पर बिफरे लोग

इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और सिंचाई विभाग के खिलाफ गुस्सा है। किसानों का आरोप है कि नहर की हालत लंबे समय से जर्जर थी और इसकी मरम्मत को लेकर कई बार शिकायतें की गई थीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत कार्य कर लिया जाता, तो आज उनकी फसलें बर्बाद होने से बच सकती थीं। फिलहाल, विभाग का कहना है कि पानी पूरी तरह से निकलने के बाद ही मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कर ली गई है।

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