

Former Minister Mannan Mallick Death: झारखंड के पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक का मंगलवार को दुखद निधन हो गया है। रांची के एक निजी अस्पताल में लंबे समय से बीमार चल रहे इस नेता ने अंतिम सांस ली। उनके इस निधन की खबर से राज्य के राजनीतिक हलकों में बहुत भारी शोक की लहर दौड़ गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके इस असामयिक निधन पर अपना गहरा दुख व्यक्त किया है।
मन्नान मल्लिक झारखंड कांग्रेस के काफी कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने धनबाद सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। बाद में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली पहली गठबंधन सरकार में उन्हें एक अहम मंत्री पद सौंपा गया था। वह लंबे समय तक धनबाद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और संगठन की मजबूती में भूमिका निभाई।
धनबाद और पूरे झारखंड के विकास में मन्नान मल्लिक की बहुत ही यादगार भूमिका रही थी। धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा ने भी कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता के निधन पर अपनी संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि मन्नान मल्लिक के जाने से धनबाद ने एक अनुभवी जननेता और समाज को समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया है। राजनीतिक विचारधाराएं अलग होने के बावजूद उनका सामाजिक योगदान बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण था।
भाजपा विधायक राज सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वैचारिक मतभेद हमारे स्वस्थ लोकतंत्र की स्वाभाविक विशेषता है। किंतु समाज और जनहित के प्रति मन्नान मल्लिक का निस्वार्थ योगदान लोगों द्वारा हमेशा स्मरणीय रहेगा। उनका स्नेह, कुशल मार्गदर्शन और गहरी आत्मीयता समाज के लोगों को हमेशा आगे बढ़ने की अच्छी प्रेरणा देती रहेगी। राजनीतिक विरोधी होने के बावजूद मन्नान मल्लिक का सम्मान सभी दलों के लोग पूरी तरह से करते थे।
मन्नान मल्लिक के निधन से महज चार दिन पहले ही धनबाद के मटकुरिया गोलीकांड मामले में फैसला आया था। जिला एवं सत्र न्यायालय ने 15 वर्ष पुराने इस गंभीर मामले में मन्नान मल्लिक को पूरी तरह दोषी ठहराया था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने मन्नान मल्लिक समेत 30 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इन सभी 30 लोगों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई गई थी।
अदालत ने मन्नान मल्लिक और अन्य 30 आरोपियों को इस मामले में तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि सजा की अवधि तीन वर्ष होने के कारण उन्हें कानूनी प्रावधानों के तहत तुरंत जमानत भी मिल गई थी। इस कानूनी झटके के मात्र 4 दिन बाद ही उनके अचानक निधन की दुखद खबर ने सबको चौंका दिया है। उनके जाने से झारखंड की राजनीति के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है।