अंधेरी AC लोकल विवाद: TC को मिली क्लीन चिट, मराठी एकीकरण समिति ने जांच पर उठाए सवाल

Mumbai Western Railway Inquiry: अंधेरी स्टेशन पर एसी लोकल में मराठी भाषा को लेकर हुए विवाद में पश्चिम रेलवे ने टिकट चेकर को क्लीन चिट दी। मराठी एकीकरण समिति ने इस फैसले का विरोध किया है।
Western Railway clears TC Saiprasad Sawant in the Andheri AC local Marathi language row. Marathi Ekikaran Samiti rejects the probe findings, alerts protest.
अंधेरी AC लोकल विवाद, TC (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Andheri AC Local Marathi Row: अंधेरी रेलवे स्टेशन पर एसी लोकल में मराठी भाषा को लेकर हुए विवाद की पश्चिम रेलवे ने प्राथमिक जांच पूरी कर ली है। रेलवे का कहना है कि जांच में टिकट जांच कर्मचारियों की ओर से किसी प्रकार का दुर्व्यवहार या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण नहीं मिले हैं। रेलवे के अनुसार, टिकट परीक्षक ने पूरी प्रक्रिया रेलवे अधिनियम, 1989 और जन विश्वास अधिनियम, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप पूरी की।

हालांकि इस निष्कर्ष पर मराठी एकीकरण समिति ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि पश्चिम रेलवे अपने कर्मचारियों का बचाव कर रही है और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, पश्चिम रेलवे के अनुसार दोपहर 2.06 बजे विरार से रवाना हुई एसी लोकल में टिकट जांच के दौरान एक यात्री से वैध टिकट मांगा गया।

यात्री के आग्रह पर कर्मचारी ने मराठी में टिकट दिखाने को कहा। लेकिन इसके बाद भी यात्री बहस करता रहा, जिससे टिकट जांच और कर्मचारी के आधिकारिक कार्य में बाधा आई। स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए यात्री को अंधेरी स्टेशन पर उतारकर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए आरपीएफ कार्यालय ले जाया गया।

हंगामा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

  • रेलवे ने कहा कि वह भाषाई विविधता का सम्मान करती है और कर्मचारियों को क्षेत्रीय भाषाओं में संवाद के लिए प्रोत्साहित करती है, लेकिन किसी भी कर्मचारी को वैधानिक कर्तव्य निभाने से रोकना स्वीकार्य नहीं है।
  • इस बीच मनसे रेल कर्मचारी सेना ने भी टिकट परीक्षक साईप्रसाद सावंत का समर्थन करते हुए कहा कि विवाद मराठी भाषा का नहीं, बल्कि टिकट जांच के दौरान हुए व्यवहार का था।
  • संगठन ने रेल प्रशासन से हंगामा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मराठी एकीकरण समिति अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख ने बाताया की वीडियो में हिंदी और अंग्रेजी पर जोर स्पष्ट दिखाई देता है, फिर भी कर्मचारी को क्लीन चिट देना मराठी भाषियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। किसी यात्री को दो घंटे तक रोककर रखने का अधिकार रेलवे को किस कानून के तहत मिला। समिति बुधवार को ज्ञापन सौंपेगी और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखेगी।

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