फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला: राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट, छानबीन समिति ने प्रमाण पत्र को माना वैध

Pratima Bagri Clean Chit: प्रतिमा बागरी को कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति से क्लीन चिट मिली। समिति ने जांच के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को वैध और प्रमाणित माना है।
Pratima Bagri Caste Certificate
प्रतिमा बागरी और प्रदीप अहिरवार
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Pratima Bagri Caste Certificate: मध्यप्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में बड़ी राहत मिली है। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने विस्तृत जांच के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को वैध और प्रमाणिक मानते हुए शिकायत को खारिज कर दिया है।

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते। सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक आदेश भी जारी किया जा सकता है।

प्रदीप अहिरवार ने की थी शिकायत

यह मामला तब सामने आया था जब मध्यप्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की नहीं, बल्कि राजपूत (सामान्य वर्ग) समाज से संबंधित हैं और उन्होंने आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए गलत जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया।

110 साल पुराने रिकॉर्ड पेश किए

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने करीब 110 वर्ष पुराने खसरा-खतौनी के रिकॉर्ड पेश किए और दावा किया कि इनमें कहीं भी उनके परिवार की जाति राजपूत दर्ज नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में कांग्रेस शासन के दौरान सतना की रैगांव सीट से उनके दादा जुगल किशोर बागरी सहित बागरी समाज के अन्य नेताओं को भी अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ाया गया था।

बागरी समाज की जातिगत स्थिति पर उठाए सवाल

वहीं शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने अपने पक्ष में करीब 430 पन्नों के दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने 1950 के भारत सरकार के गजट, विंध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ अभिलेखों का हवाला देते हुए बागरी समाज की जातिगत स्थिति पर सवाल उठाए।

छानबीन समिति ने प्रमाण पत्र को वैध माना

दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने शिकायत को आधारहीन मानते हुए प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को वैध माना है। इस फैसले को मंत्री के लिए बड़ी राजनीतिक राहत माना जा रहा है।

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