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धरती को बेहतर बनाने की सीख देती है छोटी सी ‘Aadavi’ की कहानी, दुनिया की पहली कार्बन न्यूट्रल बेबी
- Written By: रीता राय सागर
World Environment Day 2026: औसतन एक इंसान एक साल में 2 टन के करीब कार्बन प्रोड्यूस करता है। दुनिया में एक बच्चा ऐसा भी है, जिसे जीरो कार्बन न्यूट्रल बेबी का खिताब दिया जा चुका है।

बेबी आदवी (साभार. सोशल मीडिया)
World Environment Day 2026: कार्बन फुट प्रिंट यह तय करता हैं कि जलवायु परिवर्तन कैसा होगा और इसके प्रभावों को कम करने या समाप्त करने की संभावना कैसे कम होगी। जीरो कार्बन उत्सर्जन को प्राप्त करना आश्चर्यजनक के साथ-साथ आशावादी भी हो सकता है। एक दो साल की लड़की ने साबित कर दिया है कि छोटा सा कदम भी बड़ा बदलाव ला सकता है। आइए मिलते है, आदावी से, जिसे एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने वर्ल्ड फर्स्ट जीरो न्यूट्रल कार्बन बेबी की तरह पहचान दिलाई है।
आदवी के साथ बड़े हो रहे 6000 पेड़
आदवी के इस टाइटल के पीछे है उनके माता-पिता की विजनरी सोच है, जिन्होंने तमिलनाडु के किसानों के साथ मिलकर 6000 फलों के पेड़ लगाए है, जो आदावी के साथ-साथ बड़े हो रहे हैं। इससे आदवी अपने पूरे जीवन में शून्य कार्बन प्रोड्यूस करेगी। तमिलनाडु में अपने घर के आसपास 6,000 फलों के पेड़ लगाने के बाद, आदावी का कार्बन उत्सर्जन पूरी तरह से अवशोषित हो जाएगा।
उसके माता-पिता, दिनेश क्षत्रियण एसपी और जनगा नंदिनी रामास्वामी ने अपने होम स्टेट के विभिन्न किसानों के साथ सहयोग करके बेटी के जन्म से पहले ही मिशन के लिए खुद को समर्पित कर दिया था, क्यों कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए एक बेहतर प्लेनेट का सपना देखा था।
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कैसे मुमकिन हो पाई यह उपलब्धता
आदवी के माता-पिता के अनुसार, पेड़ लगाने, वनों का संरक्षण करने, जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने, तटीय क्षेत्रों की देखभाल करने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने जैसी पहलों के माध्यम से एक सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर बढ़ा जा रहा है। दिनेश और जनगा एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं, जो सतत विकास की दिशा में अग्रसर है। महज़ दो वर्षों में, उन्होंने पूरे भारत में चार लाख पेड़ लगाए हैं और वनों को पुनर्जीवित किया है, जिससे अनगिनत लोगों को उनके इस कार्य से प्रेरणा मिली है।
आदवी के माता-पिता ने भारत में कार्बन न्यूट्रैलिटी को बढ़ावा देने के लिए Seerakhu की शुरुआत की। उन्होंने 6,000 पेड़ों, झाड़ियों और पौधों वाला एक ‘फूड फॉरेस्ट’ लगाकर इस लक्ष्य को हासिल किया। मार्च 2024 में, तमिलनाडु सरकार ने आदवी के इस काम को पहचान देते हुए उन्हें Child Ambassador of Green Mission घोषित किया।
प्लांटेशन (सोशल मीडिया)
‘इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज’ (ISEC) की रिपोर्ट के अनुसार, एक औसत भारतीय हर साल लगभग 1.9 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करता है। उत्सर्जन में यह बढ़ोतरी जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विकास और जीवाश्म ईंधनों के बढ़ते इस्तेमाल जैसे कारकों की वजह से हो रही है। फलदार पेड़ लगाने के प्रति आदवी के माता-पिता का समर्पण न केवल पर्यावरण के क्षेत्र में एक उपलब्धि है, बल्कि यह समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी एक जीता-जागता उदाहरण है।
माता-पिता ने जॉब छोड़ शुरू की NGO
आईआईटी, मद्रास की हाइपेइंग जॉब को छोड़कर दिनेश ने अपनी पत्नी नंदिनी के साथ मिलकर एक एनजीओ की शुरूआत की, जिसका नाम सिराखू रखा। इस संस्था का एकमात्र लक्ष्य कार्बन न्यूट्रल इंडिया बनाना है। वे अन्य भारतीयों को पेड़ लगाने के माध्यम से अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए शिक्षित भी करते हैं। बीते दो वर्षों में दंपत्ति ने चार लाख से अधिक पेड़ लगाए है और जंगलों को पुनर्जीवित करने में कामयाब रहे हैं।
क्या होता है जीरो कार्बन उत्सर्जन
एक व्यक्ति, कंपनी या देश कार्बन न्यूट्रल तब होता है, जब वे कार्बन डाइऑक्साइड को संतुलित करते हैं, जो वे अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों के माध्यम से वायुमंडल में रिलीज करते है। इसे शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन कहा जाता है। शुद्ध शून्य उत्सर्जन की परिभाषा को कभी-कभी मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जैसी अन्य गैसों को भी किया जाता है। ये अन्य गैसें वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 24% और शेष 76% कार्बन डाइऑक्साइड का योगदान करती हैं।
कैसे कम करें कार्बन उत्सर्जन
जीरो कार्बन रिलीज के दो मुख्य तरीके हैं:- उत्सर्जन को कम करना और वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को हटाना। टेक्नोलॉजी के माध्यम से जो सक्रिय रूप से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं, उसके लिए पेड़ लगाना ही एकमात्र विकल्प है।
आदवी (साभार.सोशल मीडिया)
हमेशा सुर्खियों में रहते हैं आदवी के माता-पिता
यह कहानी अपने आप में एक मिसाल है कि अकेला कदम भी बड़े पैमाने पर पर्यावरण पर प्रभाव डाल सकता है। दंपत्ति ने बीते वर्ष तब सुर्खियां बटोरी थी, जब उन्होंने हैरी पोटर थीम में शादी की थी। इस शादी के लिए एक चेन्नई बेस्ड स्टार्टअप ने हॉगवॉर्ट स्कूल ऑफ विचक्राफ्ट थीम में वेन्यू को तैयार किया था।
इसके बाद कपल ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी थी, जब उन्होंने अपनी बेटी के जन्म के बाद उसे तोहफे के रूप में Non-Fungible Token (NFT) दिया था।
ये भी पढ़ें- World Environment Day 2026: सिर्फ एक दिन नहीं, धरती को बचाने का संकल्प है इस साल का ‘Climate Action’ थीम
क्या होता है Non-Fungible Token
NFT 2014 के बाद से ही डिजिटल मुद्रा बाजार में धूम मचा रही है। जब डिजिटल करेंसी अस्तित्व में आईं, तब डिजिटल संपत्ति की दुनिया में एनएफटी की चर्चा बढ़ने लगी। आर्ट और संगीत से लेकर वर्चुअल रियल एस्टेट तक, एनएफटी डिजिटल एसेट्स ने अद्वितीय डिजिटल आइटम खरीदने, बेचने और खुद के लिए एक नए तरीके के रूप में लोकप्रियता हासिल की। NFT तब अस्तित्व में आया, जब कई लोकप्रिय कंपनियों ने क्रिप्टोकरेंसी स्वीकार करना शुरू कर दिया और लोगों ने NFT के माध्यम से बहुत पैसा कमाया।
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