यवतमाल विधान परिषद चुनाव: भाजपा बागी ने नामांकन वापस लिया, दुष्यंत चतुर्वेदी का निर्विरोध निर्वाचन तय

Yavatmal Local Authorities MLC Election: गोंदिया जिले की सालेकसा तहसील के धनेगांव में स्थित कचारगढ़ गुफा में राष्ट्रीय गोंडवाना महाअधिवेशन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।
BJP rebel Syed Farooq withdraws nomination
भाजपा बागी नामांकन वापस लेके हूए (सोर्स - नवभारत)
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Dushyant Chaturvedi's Unopposed Election Assured: यवतमाल स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव में भाजपा के बागी उम्मीदवार नितीन भुतड़ा तथा निर्दलीय उम्मीदवार सैयद फारुख और साजिद बेग ने गुरुवार को अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। इसके साथ ही शिवसेना (शिंदे गुट) के उम्मीदवार दुष्यंत चतुर्वेदी के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

अब उनकी जीत की केवल औपचारिक घोषणा शेष है। इससे पहले कांग्रेस उम्मीदवार साहबराव कांबले ने बुधवार को अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया था, जिससे चतुर्वेदी की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। हालांकि भाजपा के बागी उम्मीदवार नितिन भुतड़ा के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई थीं।

कांग्रेस गुट में नाराजी नितिन भुतड़ा ने नामांकन

दाखिल करते समय ही स्पष्ट कर दिया था कि वे पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन करेंगे। इसी के तहत नामांकन वापसी के अंतिम दिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार सैयद फारुख और साजिद बेग ने भी चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया। इस बीच, कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार होने के बावजूद साहबराव कांबले द्वारा पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिए बिना नामांकन वापस लेने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। चर्चा है कि कांग्रेस जिला अध्यक्ष सचिन नाइक ने कांबले को पार्टी से निष्कासित करने की मांग की है। साथ ही कांबले के शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। नितिन भुतड़ा ने जारी बयान में कहा कि वे भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं और पार्टी हित को सर्वोच्च मानते हुए उन्होंने अपना नामांकन वापस लिया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि यवतमाल स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से एक बार फिर यवतमाल जिले के बाहर का उम्मीदवार विधान परिषद में पहुंचने जा रहा है।

यवतमाल विधान परिषद चुनाव में उभरा 'राजनीतिक समन्वय का संजय राठौड़ मॉडल'

यवतमाल जिले को परिपक्व, समृद्ध और वैचारिक राजनीति की परंपरा प्राप्त है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद जिले के हितों से जुड़े मुद्दों पर सभी दलों के नेता एक साथ आने की परंपरा यहां लंबे समय से कायम है। इसी परंपरा की झलक यवतमाल स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव में एक बार फिर देखने को मिली। राज्य के मृदा एवं जलसंधारण मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री संजय राठोड ने शुरुआत से ही इस चुनाव को निर्विरोध कराने के लिए प्रयास किए।

विभिन्न दलों के नेताओं से उनके अच्छे संबंध, महायुति के भीतर समन्वय और राज्य के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन के बल पर महायुति के अधिकृत उम्मीदवार दुष्यंत चतुर्वेदी के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हुआ। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित महायुति के वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से संभावित राजनीतिक मुकाबले के बावजूद चुनाव निर्विरोध संपन्न हो सका। 446 मतदाताओं वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में शुरुआत में कड़े मुकाबले की संभावना जताई जा रही थी।

महाविकास आघाड़ी ने वापस लिया उम्मीदवार

संख्याबल कम होने के बावजूद महाविकास आघाड़ी ने प्रारंभ में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। लेकिन मंत्री राठौड़ द्वारा विभिन्न दलों के नेताओं से लगातार संवाद स्थापित किए जाने के बाद महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार साहबराव कांबले ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिससे निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया को गति मिली। इसे समन्वय की राजनीति का नया मॉडल करार दिया जा रहा है।

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