
पीएम मोदी और अमित शाह।
BJP Election Strategy 2026: साल 2025 राजनीतिक उठा-पटक से भरा रहा। साल की शुरुआत में दिल्ली में चुनाव और अंत में बिहार के विधानसभा चुनाव हुआ। भाजपा ने दोनों जगहों पर सत्ता कायम की। दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की सरकार बनी। बिहार में भाजपा के सहयोगी नीतीश कुमार ने फिर सीएम पद की शपथ ली। ऐसे में 2025 भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बेहद सफल रहा। पार्टी ने बीते साल न सिर्फ दबदबा कायम रखा, बल्कि सहयोगी दलों को साधने और राजनीतिक नैरेटिव तय करने की अपनी क्षमता भी दिखाई।
साथ ही भाजपा यह संदेश देने में सफल रही कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी अब भी भारतीय राजनीति की सफल जोड़ी है। अब नए साल के आगाज के साथ फिर कई राज्यों में विधानसभा चुनावों का दौर शुरू होगा। 2025 की तुलना में इस साल चुनावी पारा ज्यादा हाई रहेगा। इस साल 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। राज्यसभा की भी 73 सीटें रिक्त हो रही हैं। साल की शुरुआत में ही बीएमसी का चुनाव है। ऐसे में भाजपा के सामने कई चुनौतियां है।
इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल, पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होना है। राज्यसभा में भी 73 सीटें रिक्त हो रही हैं। चुनावी राज्यों में अधिकतर दक्षिण भारत के हैं। इनमें पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। केंद्रीय गृह मंत्री और आधुनिक भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने बंगाल के लिए दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाने का दावा कर दिया है। इसके अलावा इस महीने महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव है। इस पर सबकी निगाहें रहेंगी।
इस साल कई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं। इनमें गोवा में पोंडा, कर्नाटक में बागलकोट, महाराष्ट्र में राहुरी, मणिपुर में ताडुबी और नागालैंड में कोरिडांग सीट शामिल हैं। ये सीटें मौजूदा विधायकों के निधन के बाद खाली हुई हैं। पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट भी हाजी नूरुल इस्माल के निधन के कारण खाली है। इस्लाम यहां से टीएमसी सांसद थे। यहां भी चुनाव होगा।
पश्चिम बंगाल: मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा। चुनाव आयोग के संभावित कार्यक्रम के अनुसार राज्य में मार्च से मई के बीच चुनाव कराए जा सकते हैं। 294 सदस्यीय विधानसभा वाले इस राज्य में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। 2021 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 215 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी को 48% वोट शेयर मिला था। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में खुद को स्थापित किया था। 38% वोट शेयर के साथ भाजपा का यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम माना गया, क्योंकि 2016 के चुनाव में पार्टी केवल 3 सीटों तक सिमट गई थी। आगामी विधानसभा चुनाव केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा कर पार्टी की मंशा और आक्रामक रणनीति को स्पष्ट कर दिया है। भाजपा तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ कई मोर्चों पर हमला करने की तैयारी में है।
भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और अमित शाह।
तमिलनाडु में भी विधानसभा चुनाव है। यहां द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार है। विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में डीएमके के पाले में 133 सीटें आईं थी। उसके सहयोगी दलों की सीटों को मिलाकर ये आंकड़ा 159 हो गया था। विपक्षी भाजपा, एआईएडीएमके और अन्य दलों के गठबंधन को कुल 75 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। हालांकि, इस साल का विधानसभा चुनाव डीएमके के लिए आसान नहीं माना जा रहा। सत्ता में रहते हुए पार्टी को एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है। बात भाजपा की करें तो द्रमुक सरकार के सामने भाजपा कोई मजबूत सहयोगी खड़ा नहीं कर पाई है। द्रविड़ राजनीति और क्षेत्रीय अस्मिता के कारण भाजपा की राह यहां सबसे ज्यादा कठिन है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दक्षिण भारत में भाजपा की सफलता बिना स्थानीय सहयोगियों और क्षेत्रीय मुद्दों के संभव नहीं है।
केरल में भी विधानसभा चुनाव होगा। विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो रहा है। यहां एलडीएफ की गठबंधन सरकार है। 2021 में एलडीएफ ने दोबारा सरकार बनाई थी। उसे 99 सीटें मिली थी। यूडीएफ के हिस्से में 41 सीटें आई थी। भाजपा ने यहां 2021 और 2016 में बेहद आक्रामक अंदाज में चुनाव लड़ा, लेकिन वह खाता खोलने में नाकाम रही। 2025 में भाजपा ने केरल में बिना किसी विधायक के सियासी आक्रामकता दिखाते हुए निकाय चुनाव में दमदार प्रदर्शन किया। भाजपा ने शशि थरूर के संसदीय क्षेत्र के तिरुवनंतपुरम के नगरपालिका चुनाव में अपने प्रत्याशी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। हालांकि, नगर निकाय चुनावों में सीमित सफलता के बावजूद भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती हैं। यहां वामपंथी और कांग्रेस गठबंधन की जड़ें गहरी हैं।
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पुडुचेरी विधानसभा चुनाव मार्च से मई के बीच कराए जाने की संभावना है। 30 सदस्यीय विधानसभा वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में सियासी हलचल तेज है। यहां मुख्यमंत्री एन. रंगसामी के नेतृत्व में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) और भाजपा का गठबंधन सत्ता में है। 2021 के विधानसभा चुनाव में एआईएनआरसी ने 10 और भाजपा ने 6 सीटें जीतकर मिलकर सरकार बनाई थी। इस बार एआईएनआरसी और भाजपा गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार को एकजुट बनाए रखने की है। गठबंधन खींचतान और सत्ता विरोधी माहौल के कारण दबाव में है। हाल में पुडुचेरी के इकलौते दलित मंत्री एके साई जे सरवनन कुमार के इस्तीफे ने इन अंतर्विरोधों को खुलकर सामने लाया। इस घटनाक्रम से न सिर्फ स्थानीय भाजपा इकाई में असंतोष उजागर हुआ, बल्कि पूरे गठबंधन में दरारें स्पष्ट हो गईं।
2025 के अंत में बिहार के बांकीपुर क्षेत्र से विधायक नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। इसे भविष्य में नेतृत्व हस्तांतरण की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। 2025 ने यह साफ कर दिया कि भाजपा अब भी देश की सबसे संगठित और चुनावी तौर पर सक्षम पार्टी है, लेकिन 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में उसे न सिर्फ सत्ता विरोधी माहौल, बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता और मजबूत स्थानीय नेतृत्व से भी जूझना होगा।






