

Shashi Tharoor Meeting: कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह की अटकलों के बीच तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी से अहम मुलाकात की है। संसद भवन में हुई इस बैठक के बाद थरूर के तेवर बदले हुए नजर आए।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से शशि थरूर पार्टी की कई महत्वपूर्ण बैठकों से नदारद थे, जिसके चलते उनकी नाराजगी की खबरें लगातार सुर्खियों में थीं। कई मौकों पर उन्होंने पार्टी लाइन से अलग हटकर बयान भी दिए थे, जिससे माना जा रहा था कि वे पार्टी हाईकमान के रवैये से खुश नहीं हैं। लेकिन मंगलवार को शीर्ष नेतृत्व से मिलने के बाद उनकी बॉडी लैंग्वेज काफी सकारात्मक और बदली हुई दिखाई दी।
शशि थरूर ने मंगलवार को संसद भवन में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ करीब 90 मिनट तक लंबी बैठक की। इस बैठक को पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहे असहज माहौल को शांत करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इस बैठक के बाद उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सब कुछ ठीक है और हम साथ आगे बढ़ रहे हैं।
तिरुवनंतपुरम सांसद ने मीडिया के सामने साफ किया कि वे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं हैं और वह पहले से ही सांसद हैं। उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में चल रही तमाम चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। जिसमें कहा जा रहा था कि थरूर कांग्रेस से केरल में सीएम पद की दावेदारी चाहते हैं।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, थरूर को यह महसूस हो रहा था कि उन्हें पार्टी के आयोजनों में वह प्रमुख भूमिका नहीं दी जा रही है, जिसकी वे अपेक्षा रखते हैं। खासतौर पर कोच्चि में हुए महापंचायत कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी द्वारा मंच से उनका नाम न लेना उनकी नाराजगी का एक प्रमुख कारण माना गया था। इसी वजह से उन्होंने दिल्ली और केरल की कई रणनीतिक बैठकों से दूरी बना ली थी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व विधानसभा चुनावों से पहले किसी भी तरह के अंदरूनी मतभेद को हवा नहीं देना चाहता। यही वजह है कि राहुल गांधी और खड़गे ने थरूर से अलग से बैठक कर उनकी बातों को सुना और असहमति के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। बताया जा रहा है कि AICC पहले से ही थरूर को साधने की कोशिश में लगी थी, ताकि चुनावों से पहले पार्टी की एकजुटता का संदेश जनता के बीच जाए।
थरूर पिछले कुछ महीनों से अपनी चिंताओं को लेकर पार्टी नेतृत्व से मिलने का समय मांग रहे थे, लेकिन उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अफवाहों को जन्म दे दिया था। कभी उनके बीजेपी में जाने की चर्चाएं उड़ीं तो कभी केरल में सीपीआई (एम) के साथ संपर्क की बातें सामने आईं।
हालांकि, इन सभी खबरों को थरूर ने सार्वजनिक मंच पर सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके मुद्दे सार्वजनिक रूप से उठाने के बजाय पार्टी के भीतर ही सुलझाए जाने चाहिए। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व जानता है कि थरूर की नाराजगी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती थी।