PM Modi @75: जोशी नहीं चाहते थे बनारस छोड़ना, फिर भी मोदी ने वाराणसी से लड़ा चुनाव

PM Modi 75th Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को 75 वर्ष के हो रहे हैं। जानें वाराणसी से चुनाव लड़ने का किस्सा और मोदी के पीएम बनने की राजनीति।
PM Modi Murli Manohar Joshi
प्रधानमंत्री मोदी, मुरली मनोहर जोशी (Image- Social Media)
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PM Narendra Modi Birthday Special: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को 75 साल के हो रहे हैं। देशभर में उनके नेतृत्व और उपलब्धियों को बताते हुए भाजपा विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए उनके जन्मदिन का जश्न मनाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर उनके पुराने किस्से एक बार फिर याद किए जा रहे हैं। इसी में से एक है उनके वाराणसी से चुनाव लड़ने का किस्सा।

ये वही दौर था जब मोदी को लेकर पूरे देश में लहर उठ रही थी और भाजपा, आरएसएस व खुद नरेंद्र मोदी चाहते थे कि वो 2014 का लोकसभा चुनाव वाराणसी से लड़ें।

जोशी नहीं छोड़ना चाहते थे बनारस

उस वक्त बनारस सीट को लेकर एक बड़ी अड़चन सामने आई थी। यहां से पार्टी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी सांसद थे और वे किसी भी कीमत पर अपनी पारंपरिक सीट छोड़ने को तैयार नहीं थे। पार्टी लगातार कोशिश कर रही थी कि जोशी को मनाकर मोदी के लिए जगह बनाई जाए, मगर मामला इतना आसान नहीं था।

गांधीनगर से क्यों नहीं लड़ा चुनाव?

उससे पहले चर्चा थी कि मोदी गुजरात की गांधीनगर सीट से मैदान में उतर सकते हैं। लेकिन वहां भी मुश्किल खड़ी हो गई थी, क्योंकि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने उसी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी थी। आडवाणी लंबे समय से गांधीनगर के सांसद रहे थे और 2009 में उन्होंने 1.21 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के सुरेश पटेल को हराया था। बता दें कि साल 2009 में आडवाणी भाजपा के पीएम उम्मीदवार थे।

वाराणसी से पहली बार सांसद बने मोदी

हालांकि वक्त का पहिया घूमते-घूमते अंत में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को वाराणसी से उम्मीदवार बनाया और इतिहास गवाह है कि यहीं से उनके प्रधानमंत्री बनने की राह खुली। लेकिन उस समय का यह राजनीतिक तनाव आज भी याद किया जाता है कि जोशी बनारस छोड़ना नहीं चाहते थे, और मोदी के लिए यह सीट पार्टी को किसी भी कीमत पर सुरक्षित करनी थी।

तीसरी बार पीएम बने मोदी

नरेंद्र मोदी 2024 के लोकसभा चुनावों में वाराणसी सीट से जीतकर लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय को लगभग 1.52 लाख वोटों के अंतर से हराया। इसके साथ ही वे स्वतंत्र भारत के बाद जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसे दूसरे नेता बने, जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

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