
जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे, फोटो- सोशल मीडिया
Parliament Budget Session 2026 Conflict: संसद के बजट सत्र के सातवें दिन राज्यसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जब राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने न दिए जाने का मुद्दा उठाया, तो सदन के नेता जेपी नड्डा ने तीखा पलटवार किया। नड्डा ने कांग्रेस को ‘अहंकार’ से बचने और ‘अबोध बालक’ का बंधक न बनने की नसीहत दे डाली।
संसद के बजट सत्र का गुरुवार को सातवां दिन था, जिसकी शुरुआत ही हंगामे के साथ हुई। राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा के घटनाक्रमों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संसद का अर्थ लोकसभा और राज्यसभा दोनों से है।
खरगे का आरोप था कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश के हितों पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने सभापति से सवाल किया कि यदि विपक्ष के नेता को ही बोलने नहीं दिया जाएगा, तो सदन कैसे चलेगा? इस पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने नियमों का हवाला देते हुए कड़ा ऐतराज जताया।
नड्डा ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा के भीतर लोकसभा की कार्यवाही पर चर्चा नहीं की जा सकती है। उन्होंने खरगे से कहा कि एक वरिष्ठ नेता होने के नाते उन्हें संसदीय परंपराओं का ज्ञान होना चाहिए कि एक सदन की बातों को दूसरे सदन में उठाकर समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
सदन में बहस के दौरान जेपी नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे को संबोधित करते हुए कहा, “आप अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए”। नड्डा ने खरगे को सलाह दी कि वे कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में स्वतंत्र रूप से पार्टी चलाएं और किसी एक व्यक्ति के हितों के पीछे पूरी पार्टी की गरिमा को दांव पर न लगाएं।
राज्यसभा नेता सदन JP नड्डा जी ने राहुल गांधी को ,अबोध बालक’ कहा😂😂#Parliament pic.twitter.com/7FhbXQVCHN — सनातनी दीपक 🚩 (@Biharwale_dip04) February 5, 2026
नड्डा ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी को अपने अहंकार से बचना चाहिए। उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार बैठे थे, लेकिन विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। नड्डा का सीधा आरोप था कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है और केवल शोर-शराबे को प्राथमिकता दे रहा है।
इस बहस में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से सीधे सवाल किया कि राहुल गांधी सदन के नियमों का पालन क्यों नहीं करते हैं। रिजिजू ने कहा कि पिछले चार दिनों से सदन में जो हो रहा है, वह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने खरगे को सलाह दी कि वे अपने नेता को समझाएं कि सदन परंपराओं और नियमावली से चलता है।
आज सभी सदस्य प्रधानमंत्री का भाषण सुनना चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी अगर प्रधानमंत्री की बात नहीं सुनना चाहते हैं तो ये उनकी च्वाइस है हम उनपर अपनी बात नहीं थोपना चाहते,लेकिन बाकी सदस्य पीएम को सुनना चाहते हैं, उन्हें कैसे रोक सकते हैं: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजजू #Budget2026 pic.twitter.com/jYVjBfGF3u — आकाशवाणी समाचार (@AIRNewsHindi) February 5, 2026
रिजिजू ने आज की कार्यवाही पर बोलते हुए उम्मीद जताई कि सभी सांसद नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने कहा किआज सभी सदस्य प्रधानमंत्री का भाषण सुनना चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी अगर प्रधानमंत्री की बात नहीं सुनना चाहते हैं तो ये उनकी च्वाइस है हम उनपर अपनी बात नहीं थोपना चाहते,लेकिन बाकी सदस्य पीएम को सुनना चाहते हैं, उन्हें कैसे रोक सकते हैं।
संसद का यह सत्र शुरुआत से ही हंगामेदार रहा है। विशेष रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण पर जमकर विवाद हुआ। इसी गतिरोध के चलते बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण ही बुधवार को होने वाला पीएम मोदी का संबोधन टल गया था, जो अब आज यानी गुरुवार को राज्यसभा में होने की संभावना है।
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विपक्ष जहां सरकार पर तानाशाही और आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे नियमों के उल्लंघन और सदन के अपमान के रूप में देख रहा है। जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू के बयानों से यह साफ है कि भाजपा अब राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व को ही कटघरे में खड़ा करने की रणनीति अपना रही है। फिलहाल सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है, जिससे विधायी कार्यों पर असर पड़ रहा है।






