

Industrialist Sudhir Mehta Airlifted From Mumbai-Pune Expressway: मंगलवार शाम मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक गैस टैंकर के पलट जाने से यातायात की जो स्थिति बनी, उसने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। इस भीषण जाम में आम जनता के साथ-साथ पुणे के मशहूर उद्योगपति और 'पिनैकल इंडस्ट्रीज' के चेयरमैन सुधीर मेहता भी फंस गए। करीब 8 घंटे तक अपनी कार में कैद रहने के बाद, जब स्थिति सुधरती नहीं दिखी, तो उन्होंने मौके से निकलने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा लिया।
यह हादसा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला घाट के पास हुआ, जहां एक गैस टैंकर पलट गया। चूंकि टैंकर से अत्यधिक ज्वलनशील गैस का रिसाव हो रहा था, इसलिए सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने पूरे यातायात को रोक दिया। यह जाम इतना लंबा खिंचा कि यात्री 30 से 33 घंटे तक सड़क पर ही फंसे रहे। बुधवार देर रात जाकर मुंबई की ओर जाने वाले रास्ते को बहाल किया जा सका।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी आपबीती साझा करते हुए सुधीर मेहता ने जाम की हवाई तस्वीरें पोस्ट कीं। उन्होंने बताया कि 8 घंटे तक जाम में जूझने के बाद वे बुधवार को हेलीकॉप्टर के जरिए पुणे लौट पाए। उन्होंने लिखा, "लाखों लोग पिछले 18 घंटों से सिर्फ एक गैस टैंकर के कारण फंसे हुए हैं। यह स्थिति चिंताजनक है।"
सुधीर मेहता ने इस घटना को एक सबक की तरह लेने की सलाह दी। उन्होंने हाई-स्पीड कॉरिडोर पर बेहतर आपातकालीन प्रबंधन की वकालत करते हुए दो मुख्य सुझाव दिए।
इमरजेंसी एग्जिट पॉइंट्स: एक्सप्रेसवे पर विभिन्न स्थानों पर ऐसे 'निकास बिंदु' होने चाहिए जिन्हें आपात स्थिति में खोला जा सके, ताकि वाहन वापस मुड़ सकें।
हेलीपैड की अनिवार्यता: उन्होंने कहा कि एक हेलीपैड बनाने में 10 लाख रुपये से कम का खर्च आता है और इसके लिए एक एकड़ से भी कम जमीन चाहिए। एक्सप्रेसवे के किनारे निश्चित अंतराल पर हेलीपैड होने चाहिए ताकि मेडिकल इमरजेंसी या ऐसी आपदा में लोगों को निकाला जा सके।