

Rahul Gandhi Letter to OM Birla: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और स्पीकर ओम बिरला के बीच तल्खी काफी बढ़ गई है। राहुल गांधी ने मंगलवार को स्पीकर को एक पत्र लिखकर उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर उन्हें सदन में बोलने से रोका जाना लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है। यह पूरा विवाद चीन मुद्दे और पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण को लेकर खड़ा हुआ है, जिस पर राहुल गांधी सदन में अपनी बात रखना चाहते थे।
सदन में जारी गतिरोध के बीच राहुल गांधी ने सोमवार और मंगलवार को पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित एक लेख का हवाला देकर चीन का मुद्दा उठाने की कोशिश की थी। हालांकि, आसन से उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने लेख को सत्यापित किया और उसे सदन के पटल पर रख दिया। अपने पत्र में उन्होंने संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज सत्यापित करने के बाद सदस्य को बोलने की अनुमति मिलनी चाहिए।
पत्र में राहुल गांधी ने विस्तार से लिखा है कि सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर ने उन्हें उस पत्रिका के लेख को सत्यापित करने का निर्देश दिया था, जिसका वे उल्लेख करना चाहते थे। राहुल ने बताया कि जब उन्होंने अपना भाषण फिर से शुरू किया, तो उन्होंने उस दस्तावेज को सत्यापित कर दिया था। कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि सदन की लंबे समय से चली आ रही परंपरा और पूर्व अध्यक्षों के निर्णयों के अनुसार, यदि कोई सदस्य सदन में किसी दस्तावेज का उल्लेख करना चाहता है, तो उसे पहले उसे सत्यापित करना होता है और सामग्री की जिम्मेदारी लेनी होती है।
राहुल गांधी ने आगे लिखा कि एक बार यह शर्त पूरी हो जाए तो अध्यक्ष सदस्य को उस दस्तावेज को उद्धृत करने या उसका संदर्भ देने की अनुमति देते हैं। इसके बाद उस पर उत्तर देना सरकार की जिम्मेदारी होती है और अध्यक्ष की भूमिका वहीं समाप्त हो जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज लोकसभा में उन्हें बोलने से रोकना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि इससे यह गंभीर आशंका भी पैदा होती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा था जिस पर चर्चा अनिवार्य है।
कांग्रेस नेता ने स्पीकर को याद दिलाया कि सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करना उनकी संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है। राहुल गांधी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सदस्य का बोलने का अधिकार हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है। लेकिन इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से इनकार किए जाने के कारण एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है।
उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के इशारे पर अध्यक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना पड़ा है। नेता प्रतिपक्ष ने कड़े शब्दों में कहा कि यह हमारे लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है, जिसके विरुद्ध वे अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हैं।