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अगले साल चुनाव, फिर भी असम में क्यों SIR नहीं? CEC ज्ञानेश कुमार ने बताई बड़ी वजह
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
Election Commission: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 12 राज्यों में SIR के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की, लेकिन असम को बाहर रखने की वजह अलग नागरिकता कानून और सुप्रीम कोर्ट की जांच बताई।

प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
SIR in 12 States: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण की शुरुआत मंगलवार से करने की घोषणा की है। हालांकि, इस सूची में असम का नाम शामिल नहीं है। असम को बाहर रखने की वजह वहां के अलग नागरिकता नियम और सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में चल रही नागरिकता जांच है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने घोषणा की कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का दूसरा चरण मंगलवार (28 अक्टूबर) से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा। इन राज्यों में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, गोवा, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने सभी 36 राज्यों के चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर इस प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की है। SIR यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और कोई भी अपात्र मतदाता सूची में शामिल न हो। चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि यह वर्तमान में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) स्वतंत्रता के बाद से नौवां ऐसा अभ्यास है, जिसकी पिछली कोशिश 2002-04 में हुई थी।
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असम में SIR लागू न होने की खास वजह
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से असम को लेकर सवाल पूछा गया, क्योंकि अगले साल वहां विधानसभा चुनाव होने हैं, फिर भी SIR की सूची में उसका नाम नहीं है। जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारतीय नागरिकता कानून में असम के लिए नागरिकता के लिए अलग प्रावधान हैं। दूसरा कारण यह है कि असम में सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में नागरिकता की जांच का कार्यक्रम पूरा होने वाला है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में 24 जून के लिए जो SIR का आदेश पूरे देश के लिए था, वह असम पर लागू नहीं होता है। CEC ने बताया कि असम के लिए अलग से रिवीजन के आदेश जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू है, जिसके कारण वहां नागरिकता का कानून थोड़ा अलग हो जाता है, और इसीलिए SIR प्रक्रिया अलग तरीके से चलाई जाएगी।
बिहार ने स्थापित किया सफलता का मानक
CEC ज्ञानेश कुमार ने पहले चरण में SIR की सफलता के लिए बिहार के मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने बिहार के 7.5 करोड़ मतदाताओं को नमन किया, जिन्होंने इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने कहा कि बिहार के मतदाताओं की भागीदारी शानदार रही है और यह अन्य राज्यों के लिए एक मानक स्थापित करती है।
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बिहार में 90,000 से अधिक मतदान केंद्रों को शामिल करते हुए यह प्रक्रिया बिना किसी अपील के सफलतापूर्वक पूरी हुई थी। बिहार में मतदाता सूची की सफाई का काम पूरा होने के बाद 30 सितंबर को लगभग 7.42 करोड़ मतदाताओं वाली अंतिम सूची प्रकाशित की गई थी।
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