
बिहार में लगे तगड़े झटके के बीच कांग्रेस के लिए आई बड़ी 'गुड न्यूज' (फोटो- सोशल मीडिया)
Congress Leaders Joining Again Party: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस पार्टी को गहरा जख्म दिया है। वहां पार्टी को महज 6 सीटों पर सिमटना पड़ा, जिससे कार्यकर्ताओं और नेतृत्व में जबरदस्त निराशा का माहौल है। लेकिन इस भारी मायूसी के बीच एक दूसरे राज्य से कांग्रेस के लिए राहत भरी ठंडी हवा का झोंका आया है। जहां एक तरफ पूरब में पार्टी कमजोर हुई है, वहीं उत्तर भारत के एक अहम राज्य में उसे बड़ी कामयाबी मिली है। वहां एक नई पार्टी को छोड़कर दो कद्दावर पूर्व मंत्री अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।
बुधवार को जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। पूर्व मंत्री जुगल किशोर शर्मा और अब्दुल मजीद वानी ने गुलाम नबी आजाद की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) को अलविदा कह दिया और कांग्रेस का हाथ थाम लिया। यह आजाद की पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, जिसे उन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बाद 2022 में बनाया था। इन नेताओं की वापसी का स्वागत कांग्रेस महासचिव सैयद नासिर हुसैन, प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा और जी.ए. मीर ने किया। यह खबर बिहार की हार से निराश कांग्रेस कार्यकर्ताओं में थोड़ा जोश भरने का काम करेगी।
जुगल किशोर शर्मा और अब्दुल मजीद वानी के साथ-साथ विधान परिषद के पूर्व सदस्य सुभाष गुप्ता और बृजमोहन शर्मा ने भी कांग्रेस की सदस्यता ली। जुगल किशोर शर्मा ने पिछले चुनाव में वैष्णो देवी और वानी ने डोडा सीट से किस्मत आजमाई थी, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जुगल किशोर शर्मा का कद इस बात से समझा जा सकता है कि वे 2000 से 2005 तक मुफ्ती मोहम्मद सईद और फिर आजाद की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वानी भी पूर्व में मंत्री रहे हैं। कांग्रेस में शामिल होते ही शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती है और अपने नेताओं को खुलकर बोलने की आजादी देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस धर्म की राजनीति नहीं करती।
यह भी पढ़ें: भतीजे के साथ बिस्तर पर थी पत्नी, पति ने देखा तो उड़ गए होश; CCTV में कैद ‘अवैध इश्क’ का खूनी अंत
गुलाम नबी आजाद की पार्टी के लिए यह दौर बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। यह पहली बार नहीं है जब उनके साथी उन्हें छोड़कर गए हैं। इससे पहले इसी साल जून में पूर्व मंत्री ताज मोहिउद्दीन और गुलाम नबी सरूरी ने भी घर वापसी की थी। अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में आजाद की पार्टी ने 90 में से 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन खाता भी नहीं खोल सकी थी। खुद आजाद ने खराब सेहत का हवाला देकर प्रचार नहीं किया था। अब बिहार में मिली निराशा के बीच, इन नेताओं की वापसी ने कांग्रेस को यह संदेश दिया है कि पुराने वफादार अब भी पार्टी को एक मजबूत विकल्प मानते हैं।






