राज्यसभा पर उद्धव ठाकरे का बड़ा दांव, शरद पवार किनारे, कांग्रेस से सीधी बात

Maharashtra Rajya Sabha Election: महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव से पहले महाविकास आघाड़ी में खींचतान तेज हो गई है जहां उद्धव ठाकरे गुट और कांग्रेस के बीच सीधी बातचीत से शरद पवार की दावेदारी पर सवाल उठ रहे।
Uddhav Thackeray strategy
Sharad Pawar Rajya Sabha (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Maharashtra Rajya Sabha Election: महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव की घोषणा होते ही विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (मविआ) में सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के बीच सीधी बातचीत शुरू हो गई है और इस पूरी कवायद में राकां (शरद पवार गुट) को दरकिनार कर दिया गया है।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च 2026 को मतदान होगा। इनमें शरद पवार, रामदास आठवले, फौजिया खान, रजनी पाटील, प्रियंका चतुर्वेदी, धैर्यशील पाटील और भागवत कराड जैसे दिग्गजों की सीटें शामिल हैं।

मविआ के पास सिर्फ 50 विधायक

मौजूदा विधानसभा संख्या बल के हिसाब से मविआ के पास 50 विधायक हैं। चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 27 वोटों का कोटा चाहिए, इसलिए आघाड़ी को कम से कम एक सीट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन वह सीट किस पार्टी को मिले, इसी पर घमासान मचा है।

शरद पवार की राज्यसभा वापसी अधर में

शुरुआत में संजय राउत ने शरद पवार को राज्यसभा भेजने का संकेत दिया था। लेकिन आदित्य ठाकरे के यह कहने के बाद कि “शिवसेना सबसे बड़ा दल है, इसलिए पहला दावा हमारा है”, राउत को यू-टर्न लेना पड़ा। अब राउत कह रहे हैं कि बैठकर निर्णय लिया जाएगा। इससे शरद पवार की उम्मीदवारी संदिग्ध हो गई है। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर पिता की 60 साल की संसदीय यात्रा को याद करते हुए एक भावनात्मक पोस्ट साझा की है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। इसे बड़े पवार के राजनीति से निवृत्ति का संकेत माना जा रहा है।

आघाड़ी में खींचतान

दूसरी तरफ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे ने साफ कहा है कि मविआ में दूसरे नंबर की पार्टी होने के नाते राज्यसभा या विधान परिषद में से एक सीट कांग्रेस को मिलनी चाहिए। विधान परिषद की 9 सीटें मई में खाली होंगी, जिनमें उद्धव ठाकरे की सीट भी शामिल है। ठाकरे गुट उन्हें वहां से दोबारा निर्वाचित कराना चाहता है।

महायुति को संख्याबल का फायदा

विधानसभा में स्पष्ट बहुमत रखने वाली महायुति (BJP + शिवसेना शिंदे + NCP अजित) 7 में से करीब 6 सीटें जीत सकती है। आघाड़ी में बिना बातचीत के चल रहे दावे-प्रतिदावे से अंदरूनी तनाव बढ़ता दिख रहा है। सभी की नजरें अब इस बात पर हैं कि सीट बंटवारे पर आखिरी फैसला क्या होगा और क्या मविआ अपनी एक सीट भी बचा पाएगी?

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