अश्लील रील या हिंदुत्व में कील? हुमायूं ने काटा निशा का टिकट...तो मच गया बवाल, क्यों हिल गई सियासत?

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में भले ही विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं, लेकिन सियासी पारा अभी से चढ़ गया है। हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंकाया भी और बंगाल में बवाल भी मचा दिया है।
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हुमायूं कबीर व निशा चटर्जी (डिजाइन फोटो)
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Nisha Chatterjee: हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी ने सोशल मीडिया स्टार निशा चटर्जी को उम्मीदवार बनाया, मगर महज 24 घंटे के भीतर ही उनका टिकट काट दिया। इस यू-टर्न के पीछे 'अश्लील वीडियो' का हवाला दिया है।

दूसरी तरफ वहीं दूसरी तरफ निशा चटर्जी हुमायूं कबीर और उनकी पार्टी के इस कद को धर्म के नाम पर भेदभाव बता रही हैं। उन्होंने कहा है कि यह अपमान है और वह इसे अदालत तक लेकर जाएंगी। जिसके बाद यह विवाद अब कानूनी लड़ाई की तरफ बढ़ चला है और सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

निशा चटर्जी की हुमायूं को चेतावनी

टिकट कटने के बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पार्टी का कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद निशा की कुछ तस्वीरों के कारण यह फैसला लिया गया। वहीं, निशा चटर्जी ने पलटवार करते हुए इसे अपनी छवि धूमिल करने की साजिश बताया है। उनका साफ कहना है कि उन्हें हिंदू होने की सजा मिली है। निशा ने हुमायूं कबीर पर गंभीर आरोप लगाते हुए मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी है, जिससे बंगाल की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।

अश्लील रील या फिर मजहबी कार्ड?

हुमायूं कबीर की पार्टी द्वारा टिकट काटे जाने के बाद निशा चटर्जी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और एक न्यूज चैनल से बातचीत में अपना दर्द बयां किया। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बिना कोई गलती किए वह निशाना कैसे बन गईं। उन्होंने कहा कि टिकट रद्द करने के इस तरीके ने न सिर्फ उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाया है बल्कि उनके करियर पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उन्होंने जनता उन्नयन पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि केवल एक दिखावा है और असलियत कुछ और ही है।

मुझे क्यों ट्रोल किया जा रहा है: चटर्जी

निशा ने घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए कहा कि हुमायूं कबीर ने उन्हें खुद मुर्शिदाबाद में अपनी पार्टी की जनसभा के लिए आमंत्रित किया था। जब वहां उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम पुकारा गया, तो वह खुद हैरान रह गई थीं। निशा का कहना है कि उन्होंने कभी भी टिकट के लिए न तो आवेदन किया था और न ही अपना नाम घोषित करने की मांग की थी। ऐसे में अब जब नाम वापस लिया गया है, तो उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल क्यों किया जा रहा है? उन्हें 'बांग्लादेशी' जैसे शब्दों से क्यों पुकारा जा रहा है और हिंदू होने के नाम पर उनका अपमान क्यों हो रहा है?

पहले क्यों नहीं की गई जांच: निशा

उन्होंने कबीर की पार्टी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मेरी पृष्ठभूमि या सोशल मीडिया प्रोफाइल में कुछ गलत था, तो 2026 चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित करने से पहले उसकी जांच क्यों नहीं की गई? निशा ने एक पुराना वाकया याद दिलाते हुए बताया कि उन्होंने पहले बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण के मुद्दे पर हुमायूं कबीर का समर्थन किया था। यह वही मुद्दा था जिसके कारण कबीर का तृणमूल कांग्रेस से विवाद हुआ था। निशा का आरोप है कि हुमायूं कबीर ने उनकी सोशल मीडिया फॉलोइंग का इस्तेमाल अपनी नई पार्टी को मशहूर करने के लिए किया। कबीर चाहते थे कि मेरे जरिए उनकी पार्टी को अटेंशन मिले और अब जब काम हो गया तो उन्हें दरकिनार कर दिया गया।

मुझे लगातार मिल रही हैं धमकियां

निशा ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मुझे लगातार धमकियां मिल रही हैं। मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं और इस माहौल में अपनी सुरक्षा को लेकर काफी डरी हुई हूं। इस पूरे घटनाक्रम से आहत होकर अब निशा चटर्जी ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है। उन्होंने हुमायूं कबीर के खिलाफ मानहानि और चरित्र हनन का मुकदमा दर्ज करने की बात कही है। निशा ने साफ कर दिया है कि वह अपनी गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगी।

'फैमिली प्रेशर और मुस्लिम वोट बैंक'

दूसरी तरफ निशा चटर्जी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद हुमायूं कबीर ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी और अपना पक्ष रखा। कबीर ने कहा कि वह निशा के आरोपों पर लंबी बहस नहीं करना चाहते, लेकिन उन्होंने टिकट काटने की वजह साफ की। कबीर ने बताया कि उन्होंने टिकट का ऐलान तो कर दिया था, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर निशा की कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए जो उन्हें और उनके परिवार को उचित नहीं लगे। कबीर ने स्वीकार किया कि उनके घर पर भी इस बात को लेकर परेशानी हुई, उनके बेटे और अन्य घरवालें ने निशा की उम्मीदवारी पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

हुमायूं कबीर ने बताया कि इसी विरोध के चलते उन्हें महज चार घंटे के अंदर अपना फैसला बदलना पड़ा और निशा को हटाने का निर्णय लेना पड़ा। इसके अलावा, कबीर ने सियासी समीकरणों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बालीगंज विधानसभा सीट पर 49 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। इस जनसांख्यिकी को देखते हुए वहां किसी मुस्लिम उम्मीदवार को ही टिकट देना रणनीतिक रूप से सही है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोलकाता में ऐसी कई सीटें हैं जहां सिर्फ हिंदू परिवार के सदस्यों को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा, इसलिए उन पर भेदभाव का आरोप लगाना गलत है।

विवाद को बताया सियासी साजिश

कबीर ने इस विवाद के पीछे एक राजनीतिक साजिश की ओर भी इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि बहुत बारीकी से जांच करने के बाद उन्हें पता चला है कि कैमक स्ट्रीट के एक तृणमूल कांग्रेस अधिकारी ने यह सब किया है। कबीर का मानना है कि निशा की वे तस्वीरें जानबूझकर वायरल की गईं ताकि उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचाया जा सके।

आगे से पूरी सावधानी बरतेंगे: कबीर

उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में वह उम्मीदवारों की सूची तय करते समय बहुत सावधानी बरतेंगे और ऐसे किसी व्यक्ति को शामिल नहीं करेंगे जिसकी छवि पर सवाल हो। कबीर ने साफ किया कि वह इस विवाद को अब और तूल नहीं देना चाहते और वे निशा के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनका फोकस अपनी पार्टी को मजबूत करने पर है।

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