जड़ी बूटियों में छुपा है आयुर्वेद का सार (सौ. सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: दुनियाभर में कई बीमारियों का जाल फैल चुका है इसके लिए एलोपैथी दवाइयों का सेवन लोग करते है। एलोपैथी दवाईयां अपनी जगह सही है लेकिन सबसे प्राचीन आयुर्वेद का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। आयुर्वेद आज भी नई-नई बीमारियों में भी असर करता है। एक आम सवाल उठता है – जब तब की जीवनशैली, खानपान और वातावरण बिलकुल अलग था, तो उस दौर के इलाज आज कैसे काम कर सकते हैं? इसका जवाब शरीर की प्रकृति में छिपा है। भागदौड़ भरी जिंदगी में भले ही लोगों का रहन-सहन और जीवन शैली बदल गई है लेकिन पाचन तंत्र, प्रतिरक्षा प्रणाली, मन आज भी वैसे ही काम करता है। आयुर्वेद किस तरह आज उपयोगी है चलिए जानते है…
आपको बताते चलें, आयुर्वेद की ताकत आज भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में नजर आती है। आयुर्वेद बीमारियों को दबाने के बजाय शरीर के संतुलन को दोबारा स्थापित करता है। यह मानता है कि अगर शरीर की अग्नि यानी पाचन शक्ति मजबूत है और ओजस यानी प्रतिरक्षा शक्ति संतुलित है, तो शरीर खुद ही रोगों से लड़ सकता है। सुश्रुत संहिता और चरक संहिता दो ऐसे ग्रंथ हैं जो अच्छी जीवनशैली को ही स्वस्थ रहने की कुंजी मानते हैं। सुश्रुत संहिता व्यायाम और स्वच्छता को तरजीह देती है, तो चरक संहिता आहार और भोजन के माध्यम से स्वास्थ्य को बनाए रखने पर केंद्रित है।
आयुर्वेद की कई जड़ी-बूटियां आज की समस्याओं में बेहद कारगर साबित हो रही हैं। जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी तनाव को कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। गुडूची शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। हल्दी सूजन को कम करती है और पाचन सुधारती है। घी और सौंफ जैसे साधारण घरेलू उपाय भी पेट को स्वस्थ रखने में उपयोगी हैं।
बताया जाता है कि, जीवन शैली के आधार पर ही बीमारियां पनपती है इसके लिए अनियमित दिनचर्या, खराब आहार, नींद की कमी, और लगातार तनाव जिम्मेदार होते है। अगर बीमारी को सही करने की बात की जाए तो, आयुर्वेद बीमारियों की जड़ों को ठीक करने पर जोर देता है। आधुनिक बीमारियां चाहे कितनी भी जटिल क्यों न लगें, उनका मूल अक्सर जीवनशैली में छिपा होता है—अनियमित दिनचर्या, खराब आहार, नींद की कमी, और लगातार तनाव। आयुर्वेद इन्हीं जड़ों को ठीक करने पर जोर देता है।
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बताते चलें, इसलिए अगर कोई पूछे कि आयुर्वेद आज भी क्यों काम करता है, तो इसका जवाब यही होगा—क्योंकि शरीर वही है, सिर्फ हालात बदले हैं। और जब समाधान शरीर के स्वाभाविक ढंग से मेल खाता हो, तो वह कभी पुराना नहीं होता। आयुर्वेद एक पुरानी विद्या जरूर है, लेकिन इसका विज्ञान कालजयी है—आज भी उतना ही प्रासंगिक और असरदार जितना वह सदियों पहले था। यह सिर्फ इलाज नहीं, एक जीवनशैली है जिसे अपनाकर हम न केवल रोगों से बच सकते हैं, बल्कि बेहतर और संतुलित जीवन भी जी सकते हैं।
आईएएनएस के मुताबिक