क्यों मेंटल हेल्थ के लिए खतरनाक है Mood Swings, जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय
Mood Swings In Women: मूड स्विंग की समस्या आम है, लेकिन महिलाओं के शरीर में कुछ खास हार्मोन इसे बार-बार ट्रिगर करते हैं। इससे महिलाओं में कई प्रकार के बदलाव आते हैं। क्या हैं ये बदलाव?
- Written By: रीता राय सागर
मूड स्विंग (फोटो- सोशल मीडिया)
Mood Swings During Periods: अकसर आपने देखा होगा कि महिलाएं कभी-कभी बेहद खुश, तो कभी बेहद इमोशनल, तो कभी उदास और कभी-कभी बहुत ज्यादा चिड़चिड़ी हो जाती हैं। इसके पीछे कारण है उनके हार्मोन और इसे ही मूड स्विंग कहते हैं।
खास तौर पर यह समस्या पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के दौरान अधिक होती है। इस समस्या का कारण तनाव, नींद की कमी, खानपान या हार्मोन में बदलाव हो सकते हैं। महिलाओं में हार्मोन का उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, जिससे वे इसकी चपेट में जल्दी आती हैं।
मूड स्विंग के लिए जिम्मेदार हार्मोन
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एस्ट्रोजन (Estrogen Effects)
एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के मूड को बहुत प्रभावित करता है। पीरियड्स, प्रेगनेंसी या मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का लेवल घटता-बढ़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन या उदासी हो सकती है।
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प्रोजेस्टेरोन (Progesterone Effects)
यह हार्मोन शांति और नींद के लिए जिम्मेदार होता है। प्रोजस्टेरोन का लेवल कम होने पर तनाव व घबराहट महसूस होती है।
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सेरोटोनिन (Serotonin Effect)
सेरोटोनिन को हैप्पी हार्मोन कहा जाता है। इसके कम होने से महिलाओं में तनाव व डिप्रेशन बढ़ जाता है।
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कोर्टिसोल (Cortisol Effect)
कोर्टिसोल तनाव से संबंधित हार्मोन है। कोर्टिसोल स्तर अधिक होने पर चिंता और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं होती है।
क्या मूड स्विंग के लक्षण (Symptoms Of Mood Swings)
मूड बदलना– इस स्थिति में भावनाओं में अचानक, तीव्र और अप्रत्याशित बदलाव देखे जाते हैं।
चिंता– हर वक्त आशंका और चिंता में रहना।
चिड़चिड़ापन– हर छोटी बात पर बेचैन होना और अधीर महसूस करना।
उदासी और अवसाद– इस दौरान शॉर्ट टर्म के लिए अप्रसन्नता और निराशा हावी हो जाती है।
उल्लास और आनंद– इस स्थिति में महिलाएं बेवजह ही बहुत खुश हो जाती हैं।
नियंत्रण खोना– बिना किसी बात के बहुत अधिक गुस्सा आना।
इंटेंस फील करना– बहुत अधिक इमोशनल होना।
एनर्जी लेवल में बदलाव– अत्यधिक थकान और अति उत्साह महसूस करना।
नींद पैटर्न– नींद न आना या इसके विपरीत, बहुत अधिक नींद आना।
भूख में बदलाव– भोजन की लालसा या भूख न लगना।
मूड स्विंग के उपाय (How To Control Mood Swings)
हार्मोन मैनेज करना– पीएमएस (Premenstrual Syndrome) या गर्भावस्था के कारण होने वाले मूड स्विंग को हार्मोन थेरेपी के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।
लाइफस्टाइल में बदलाव– मूड स्विंग को लाइफस्टाइल में बदलाव करके कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
हेल्दी डाइट– फल, सब्जियां और ओमेगा-3 से भरपूर भोजन खाएं। अपने खाने में शुगर और कैफीन कम करें।
व्यायाम– इस समस्या से निपटने के लिए रोजाना 20-30 मिनट योग, वॉक या मेडिटेशन करें। इससे सेरोटोनिन बढ़ता है।
नींद– हार्मोन संबंधी समस्याओं में नींद एक प्रमुख कारक है। इसलिए 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है। नींद की कमी हार्मोन्स को बिगाड़ सकती है।
तनाव कम करें– स्ट्रेस को कई तरीके से मैनेज किया जा सकता है। गहरी सांस लें, पसंद की म्यूजिक सुनें या दोस्तों से बात करके तनाव को अपने जीवन से दूर करें।
इसके अलावा यदि समस्या अधिक है, तो मनोचिकित्सक या दवाइयों की मदद ली जा सकती है।
मूड स्विंग के लिए सुपरफूड्स
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रागी
रागी में दूध से अधिक कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और जोड़ो की मजबूती में लाभदायक होते हैं। रागी में पाया जाने वाला फाइबर और आयरन महिलाओं के डाइजेशन और ब्लड हेल्थ को सपोर्ट करता है।
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अलसी के बीज
अलसी के बीज में फाइटोएस्ट्रोजेन होता है, जो हार्मोन बैलेंस में मददगार है। इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में इसका सेवन कम करना चाहिए। सर्दियों में इसका सेवन करना बेहतर होता है। इसके नियमित सेवन से मेनोपॉज के लक्षण भी कम होते हैं।
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चुकंदर और खजूर
महिलाओं में खून की कमी या एनीमिया बेहद आम है, क्यों कि आयरन की कमी होती है। इससे निपटने के लिए चुकंदर और खजूर बेहद लाभदायक होते हैं। दोनों में आयरन भरपूर मात्रा में होते हैं, इसलिए यह शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाते हैं। इससे थकान और कमजोरी में भी लाभ मिलता है।
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डार्क चॉकलेट
खुश रहने और अच्छी नींद के लिए डार्क चॉकलेट का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट ब्रेन की फंक्शनिंग में मदद करते हैं। डार्क चॉकलेट में एंडोर्फिन पाए जाते है, इससे मूड बेहतर होता है और मैग्नीशियम नींद की क्वालिटी सुधारता है और बेचैनी को कम करता है।
