Heart Attack Symptoms: कम उम्र में क्यों बढ़ रहा है हार्टअटैक का खतरा, क्या है कारण और कैसे रखें सेहत का ख्याल
Heart Blockage Ke Lakshan: स्वस्थ दिखने वाले युवा भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। इसका बड़ा कारण लाइफस्टाइल में बदलाव माना जा रहा है। इसलिए जरूरी है कि हर उम्र के लोग अपने दिल का ख्याल रखें।
- Written By: रीता राय सागर
हार्ट अटैक का खतरा (सौ. सोशल मीडिया)
Heart Blockage Symptoms In Hindi: बीमारी की कोई उम्र या कोई तय सीमा नहीं होती है, लेकिन अपने जीवनशैली और खान-पान की आदतों में बदलाव करके बीमारियों से बचा जा सकता है। पहले अधिक उम्र के लोगों या फिर किसी क्रोनिक बीमारी से जूझ रहे लोगों में हार्ट अटैक के मामले देखे जाते थे, वहीं आज के समय में कम उम्र में हार्ट अटैक के मामले देखे जा रहे हैं।
30 से 40 की उम्र में लोगों की हार्ट अटैक से मौत हो रही है। डॉक्टरों का मानना है कि लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें, तनाव,जेनेटिक कारण और कुछ सीक्रेट बीमारियां भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।
क्या हैं हार्ट अटैक के साइलेंट कारण (Silent Heart Attack Signs)
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तनाव (Stress)
तनाव मॉडर्न लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है। करियर, वर्कलोड, फैमिली संबंधी तनाव से युवा दिन-रात डील करते हैं। इससे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। ये हॉर्मोन नसों में सूजन पैदा करते हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन अवरूद्ध होता है। क्रोनिक स्ट्रेस से एड्रेनालिन व कोर्टिसोल लेवल बढ़ जाता है, जिससे हार्ट फेल का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए स्ट्रेस को मैनेज करना बेहद जरूरी है।
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नींद (Sleep)
आजकल देर से सोना और देर से जागना लोगों की कूल जीवनशैली का हिस्सा हो गई है। लोगों को देर रात तक काम करने, पढ़ने या खाली बैठकर फोन चलाने की आदत पड़ गई है, इसका सीधा असर स्लीप साइकिल पर होता है। कई लोग लोग देर रात तक जागने व एक्टिव रहने के लिए एनर्जी ड्रिंक या कैफीन का सेवन करते हैं, जो चिंता का विषय है। एनर्जी ड्रिंक में कैफीन और शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है और यही कारण है कि इससे शरीर को मिलती है, लेकिन यह दिल की धड़कन को तेज करके ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है। साथ ही अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से एनर्जी ड्रिंक का सेवन कर रहा है, तो इससे दिल की सेहत बिगड़ने के पूरे चांसेस है।
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स्मोकिंग (Smoking)
कम उम्र के युवा सिगरेट और वेपिंग दोनों को कूल मानते हैं, लेकिन यही उनके दिल के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। निकोटिन धमनियों को सिकोड़ने का काम करता है, जिससे ब्लडप्रेशर बढ़ता है और ब्लड फ्लो में रूकावट आती है। धीरे-धीरे धमनियों में प्लाक जमने लगता है, जो कुछ समय के बाद ब्लॉकेज का कारण बन जाता है और यही स्थिति अचानक हार्ट अटैक में बदल सकती है।
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जंक फूड (Bad Food Habit)
इन दिनों फास्ट फूड सेवन बढ़ता जा रहा है। कुछ स्वाद के लिए, तो कुछ समय की कमी की वजह से इसे अपनाते हैं। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल आज कम उम्र में हार्ट अटैक के बड़े कारण बन चुके हैं। कई युवाओं में साइलेंट हाइपरटेंशन या बढ़ा हुआ ट्राइग्लिसराइड स्तर हार्ट अटैक का कारण बन जाता है और इस स्थिति का पता तब चलता है, जब समय खत्म हो चुका होता है।
हार्ट अटैक के लक्षण (Heart Attack Symptoms Without Chest Pain)
अक्सर हार्ट फेल के कुछ ऐसे सामान्य लक्षण नजर आते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे सांस लेने में तकलीफ, पसीना आना, चक्कर आना, बेचैनी, मतली या सीने में दिल से जुड़ी चुभन को कभी-कभी एसिडिटी या घबराहट समझकर इग्नोर कर देते हैं।
ये हैं वो लक्षण
- सीने में दर्द होना
- सीने में जकड़न महसूस करना
- दर्द या बेचैनी बने रहना
- पसीना आने पर ठंड महसूस होना
- थोड़ी सी मेहनत पर थक जाना
- अचानक चक्कर आना
- मचली महसूस होना
- सांस लेने में कठिनाई होना
- बाएं हाथ मे दर्द महसूस होना
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हार्ट अटैक से बचने के उपाय
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हेल्दी डाइट (Healthy Diet)
अच्छे स्वास्थ्य के लिए न केवल अच्छा खाना जरूरी है बल्कि एक बैलेंस्ड डाइट लेना बेहद जरूरी है। इस डाइट में कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन, फाइबर व माइक्रो न्यूट्रिएंट सब का कॉम्बिनेशन होना जरूरी है। 30 की उम्र के बाद हमें अपने डेली रूटीन में हाइ फाइबर, लो फैट वाले खाने को तवज्जो देना चाहिए। ताजी सब्जियां, फल, बीन्स, लो फैट डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा नमक, चीनी, शराब, रेड मीट का सेवन कम से कम करना चाहिए।
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स्ट्रेस कंट्रोल करें (Stress Management)
इस भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे जरूरी है अपने स्ट्रेस को मैनेज करना। तनाव से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ता है, जो हार्ट अटाक का सबसे बड़ा कारण है। इसे मैनेज करने के लिए वर्क लाइफ बैलेंस, दिमाग को शांत रखना, छोटी-छोटी बातों को खुद पर हावी न होने देना, नियमित व्यायाम करना और अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही मेडिटेशन से स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। अच्छी म्यूजिक सुनना या फिर अपने पसंद का कोई काम करने से भी तनाव कम होता है।
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नियमित व्यायाम करना (Regular Exercise)
अपनी दिनचर्या में से कुछ समय फिजिकल एक्टिविटी को जरूर दें। शारीरिक गतिविधि न होने से वजन बढ़ने लगता है और इससे ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा मिलता है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं प्रत्येक व्यक्ति को सप्ताह में 150 मिनट लाइट हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने के लिए एरोबिक अच्छा ऑप्शन है।
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वेट मैनेज करना (Weight Management)
हेल्दी वेट और बॉडी मास इंडेक्स को मेंटेन रखकर भी दिल के दौरे के जोखिम से बचा जा सकता है। अधिक वजन और मोटापा हार्ट के अलावा कई अन्य गंभीर बीमारियों को भी न्योता देते हैं।
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नियमित जांच जरूरी (Regular Checkup)
अक्सर डॉक्टर सलाह देते हैं कि युवाओं को समय-समय पर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच कराती रहनी चाहिए। जिन लोगों में मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, बीपी, डायबिटीज या फैमिली हिस्ट्री रही है, उन्हें समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए। इससे समय रहते ब्लॉकेज का पता चलता है।
