Ahmedabad Ashram: हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक्शन में प्रशासन, आसाराम के आश्रम के 37 मकानों पर चला बुलडोजर

Asaram Ashram Ahmedabad: अहमदाबाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद आसाराम के आश्रम के पास प्रशासन ने बुलडोज़र कार्रवाई तेज कर दी है। जिसके तहत 45 सौ वर्ग मीटर से ज़्यादा की ज़मीन खाली करवाई जा रही है।
Bulldozers Action on 37 houses Of the Asaram Ashram following a Gujarat High Court order
आसाराम आश्रम (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bulldozer Action In Asaram Ashram, Ahmedabad: अहमदाबाद में गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के बाद आसाराम के आश्रम के पास प्रशासन ने बुलडोज़र कार्रवाई तेज कर दी है। जिसके तहत 45 सौ वर्ग मीटर से ज़्यादा की ज़मीन खाली करवाई जा रही है। बताई जा रही है कि इस ज़मीन की कीमत 500 करोड रुपये से ज़्यादा है। साथ ही मौके पर विरोध और लोंगों में आक्रोश को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनात की गई है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया एक्शन

बता दें कि आसाराम के मोटेरा आश्रम ट्रस्ट की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। गुजरात हाई कोर्ट की दो जजों की पीठ ने 16 अप्रैल 2026 को आसाराम आश्रम की अपील खारिज कर दी थी। जिसके बाद अहमदाबाद विकास प्राधिकरण ने ये एक्शन लिया है। हालांकि आश्रम ने अहमदाबाद ज़िला कलेक्टर के ज़मीन वापस लेने के आदेश के ख़िलाफ़ कानूनी रास्ता अपनाया लेकिन इसका कोई फायदा नही हुआ।

37 मकानों पर चला बुलडोजर

डीसीपी जोन-2 भरत राठौड़ ने बताया कि नगरपालिका ने चांदखेड़ा में मोटेरा गांव के तहत आने वाले 37 घरों को तोड़ने का प्लान है। इसके लिए चार टीमें बनाई गई है। हर टीम के साथ पुलिस की टुकड़ी तैनात की गई है। हर टीम में एक PI, दो PSI और 25 जवान शामिल हैं। रिज़र्व में भी एक PI, दो PSI और 25 अधिकारी तैनात हैं। पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी SP डिवीज़न को दी गई है।

जानें क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक सरकारी रिकॉर्ड में लगभग 33,980 वर्ग मीटर ज़मीन दशकों पहले सीमित धार्मिक यानि पारंपरिक पूजा-पाठ और मंदिर दर्शन यादि उपयोग के लिए कड़ी शर्तों पर आवंटित की गई थी। लेकिन आश्रम ने अपनी आवंटित सीमा से ज़्यादा ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया था। जब राज्य के अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तब मामला कोर्ट तक पहुंचा।

पूरी जांच में सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड में लगभग 33,980 वर्ग मीटर ज़मीन आवंटित की गई थी, लेकिन आश्रम वालों ने लगभग 50,000 वर्ग मीटर तक बड़े पैमाने पर अपना दायरा बढ़ा लिया था जो अतिक्रमण को दर्शाता है। इस मामले को लेकर दशकों पुराने ज़मीन के रिकॉर्ड, सर्वे शीट और नक्शों पेश किया गया। राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील जी. एच. विर्क ने ज़ोर देकर कहा कि राज्य की कार्रवाई निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून का सख्ती से पालन करने पर आधारित है।

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