नई कार खरीदी है? पहले 1000 KM में भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां, वरना इंजन और माइलेज दोनों हो सकते हैं खराब

Run-in Period: नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक यादगार पल होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कार खरीदने के बाद शुरुआती 1000 किलोमीटर उसकी पूरी उम्र, माइलेज और परफॉर्मेंस पर बड़ा असर डालते हैं?
Avoid making these 8 mistakes at all costs during the first 1,000 km Run-in Period
Run-in Period (Source. magnific)
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New Car Maintenance: अपने लिए नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक यादगार पल होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कार खरीदने के बाद शुरुआती 1000 किलोमीटर उसकी पूरी उम्र, माइलेज और परफॉर्मेंस पर बड़ा असर डालते हैं? ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इस शुरुआती समय को रन-इन पीरियड कहा जाता है। इसी दौरान इंजन, गियरबॉक्स और अन्य मैकेनिकल पार्ट्स एक-दूसरे के साथ सही तरीके से सेट होते हैं। अगर इस समय लापरवाही बरती जाए तो भविष्य में कार की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है। इसलिए नई कार के शुरुआती सफर में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

क्या होता है Run-in Period और क्यों है जरूरी?

रन-इन पीरियड के बारे में बताए तो नई कार के शुरुआती कुछ हजार किलोमीटर का समय होता है। इस दौरान इंजन और दूसरे मैकेनिकल पार्ट्स धीरे-धीरे अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू करते हैं। ऑटो एक्सपर्ट्स ने बताया है कि इस अवधि में सही तरीके से ड्राइविंग करने से इंजन की लाइफ बढ़ती है, बेहतर माइलेज मिलता है और लंबे समय तक कार की परफॉर्मेंस बनी रहती है।

पहले 1000 KM में इन गलतियों से बचें

सलाह दी जाती है कि नई कार को शुरुआत में बहुत तेज स्पीड पर न चलाएं। कोशिश करें कि स्पीड 60 से 80 किमी/घंटा के बीच रहे और इंजन को 2500 से 3000 RPM से ऊपर न ले जाएं। इसके अलावा लंबे समय तक एक जैसी स्पीड पर ड्राइव करने से भी बचें। समय-समय पर स्पीड बदलने से इंजन अलग-अलग परिस्थितियों में बेहतर तरीके से सेट होता है। रन-इन पीरियड के दौरान अचानक तेज एक्सेलरेशन और हार्ड ब्रेकिंग से भी बचना चाहिए। इससे इंजन, ब्रेक सिस्टम और ट्रांसमिशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। साथ ही कार को लंबे समय तक बिना चलाए इंजन ऑन रखकर आइडल मोड में छोड़ना भी सही नहीं माना जाता।

हाईवे ड्राइव और ज्यादा वजन से करें परहेज

वहीं नई कार खरीदने के तुरंत बाद लगातार लंबी हाईवे ड्राइव से बचना बेहतर होता है। शुरुआत में छोटी दूरी और अलग-अलग ट्रैफिक कंडीशन में ड्राइव करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा कार में जरूरत से ज्यादा यात्री या भारी सामान लेकर सफर करने से बचें। भारी लोड इंजन और ट्रांसमिशन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है जिससे शुरुआती सेटिंग प्रभावित हो सकती है।

ऑयल चेक करें, पहली सर्विस बिल्कुल न छोड़ें

पहले 1000 किलोमीटर के दौरान हर 200 से 300 किलोमीटर पर इंजन ऑयल और कूलेंट का स्तर जांचना अच्छी आदत मानी जाती है। यदि किसी तरह की कमी दिखाई दे, तो तुरंत सर्विस सेंटर से संपर्क करें। सबसे जरूरी बात कंपनी द्वारा तय पहली सर्विस को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। आमतौर पर यह 1000 किलोमीटर के आसपास होती है जिसमें इंजन ऑयल, फिल्टर और अन्य जरूरी पार्ट्स की जांच की जाती है। समय पर सर्विस कराने से आपकी नई कार लंबे समय तक बेहतरीन प्रदर्शन करती है।

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